दादा जी की सीख वाली बन्दर मगरमच्छ की कहानी

     
       जब मैं बहुत छोटी थी तब मैं गर्मी की छुट्टियों में भंडारा अपने दादा जी दादी माँ के पास रहने जाती थी उन दिनों थोड़ी लम्बी छुट्टियां हुआ करती थी स्कूलों की जिसमें दिन इतने मिला करते थे की अपनी गर्मी की छुट्टियों का लुत्फ उठाया जा सके । वे दिन दादा दादी की कहानियों से बहुत सारी बातें सीखने की उन्हें अपनी जिंदगी में अमल करने की दादा जी कहानी सुनाना शुरू करने से पहले कहते थे ये कहानी सुनने में तुम्हें बहुत मजा आएगा औऱ अंत में हम तुम्हें इस कहानी से मिलने वाली सीख भी बताएंगे कहानी सुनने में जितना मजा आता था उतनी ही उत्सुकता इस बात की रहती थी की अंत में क्या होगा ।

        दादा जी कहानी बहुत रोचक तरीके से सुनाते थे ताकि कहानी सुनने में मजा भी आये औऱ सुनने में उत्सुकता बनी रहे । कई सारी कहानियां सुनाते थे जब तक मेरी छुट्टियां होती थी पर कुछ कहानियां ऐसी होती है जिन्हें हम भूल जाते हैं औऱ कुछ कहानियां मस्तिष्क में जीवन भर के लिए कैद हो जाती है औऱ हमें हमेशा याद रहती है । कहानियां भी और अपने दादा जी दादी माँ भी ।
 
         कहानियां सुनने के बाद एक बात बहुत अच्छी तरह समझ आ गई कि कहानियां तो रहती है पर जब कहानी सुनाने वाले पास ना हो तो अपना ही जीवन कहानी जैसा हो जाता है जिसकी एक - एक घटना कहानी जैसी हो जाती है जिसमें कई सारी सीखें छिपी होती है धीरे धीरे हमें एक -एक सीख समझ आती है जैसे धीरे धीरे सुनने पर कहानी समझ आती है वैसे भी बचपन के उन बच्चों वाली उम्र में सीख समझ में आती भी कहां हैं जब बड़े हो जाए तब समझ आता है कहानियां यूँही नहीं होती है जिंदगी के लिए हमारे आने वाले वक़्त के लिए एक अनमोल धरोहर एक सीख होती है दादा दादी की कहानी ।
 
         आज के बच्चे तो स्टोरी बुक्स में पढ़ लेते हैं कहानी उनके जीवन में कहानियों के लिए वक़्त कहां है पर दोस्तों जो मजा दादा जी दादी माँ के पास उनकी गोद में लेटकर कहानी सुनने में है वो मजा किताबों में नहीं मिलता है ।

ऐसा मजा किताबों में नहीं मिलता ।।
राजा रानी जानवरों की कहानी
ऐसा खजाना दोबारा नहीं खुलता ।।
सुन लो सीखो वाली कहानी
दादा दादी का साथ दोबारा नहीं मिलता ।।
एक प्यारा दुलारा बचपन


अफसोस होता है कहानियां तो है पर सुनाने वाले वो दादा जी नहीं है जिनसे रोज एक कहानी सुनने की ज़िद करती थी। काश उस वक़्त होता कोई टेप रिकॉर्डर कर लेती रिकॉर्ड उनकी मीठी आवाज में दुनिया भर की कहानियां ।

तो लीजिए मित्रों पढ़िए ऐसे ही मूर्ख मगरमच्छ औऱ बन्दर की कहानी जो मुझे दादा जी सुनाया करते थे ।
इस कहानी को मैं ऐसे ही लिख रही हूं जैसे मैं उनके पास ही बैठी हूँ

बन्दर और मगरमच्छ
     दादा जी ने सुनाना शुरू किया अकेले मैं ही नहीं सुनती हमारे पड़ोस में एक लड़की रहती थी मोनिका वो औऱ मैं एक साथ बैठकर सुना करते थे ।
     दादा जी बोले बेटा एक नदी के किनारे एक जामुन का बहुत बड़ा सा पेड़ था औऱ उस पेड़ पर एक बन्दर रहता था. उस पेड़ पर बहुत ही मीठे-मीठे जामुन लगते थे. हम दोनों ने एक साथ बोला दादा जी अपन भी जामुन खाएंगे दादा जी बोले हां पहले कहानी सुनो उसके बाद ।
      फिर उन्होंने बताया एक दिन एक मगरमच्छ खाना तलाशते हुए पेड़ के पास आया. बन्दर ने उससे पूछा तो उसने अपने आने की वजह बताई. बन्दर ने बताया की यहाँ बहुत ही मीठे जामुन लगते हैं और उसने वो जामुन मगरमछ को दिए. दादा जी बोले जैसे तुम दोनों दोस्त हो वैसे ही बन्दर की मित्रता नदी में रहने वाले मगरमच्छ के साथ हो गयी. वह बन्दर उस मगरमच्छ को रोज़ खाने के लिए मीठे मीठे जामुन देता रहता था.

        एक दिन उस मगरमच्छ ने घर जाकर कुछ जामुन अपनी पत्नी को भी खिलाये. स्वादिष्ट जामुन खाने के बाद मगरमच्छ की पत्नी ने यह सोचकर कि जो बंदर रोज़ ऐसे मीठे फल खाने को देता है जब जामुन इतने मीठे है तो दादा जी बोले जामुन देने वाले बन्दर का दिल भी खूब मीठा होगा, उसने अपने पति से कहा कि उसे उस बन्दर का दिल चाहिए और वो इसी ज़िद पर अड़ गई. उसने बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि जब तक बन्दर का कलेजा उसे मिलेगा वो ठीक नहीं हो पायेगी.


       पत्नी कि ज़िद से मजबूर हुए मगरमच्छ ने एक बन्दर महाशय के लिए एक तरकीब सोची और बन्दर से कहा कि उसकी भाभी ने उसे उसके घर पर दावत के लिए बुलाया है . बन्दर ने कहा कि वो भला नदी में कैसे जायेगा? मगरमच्छ ने उपाय सुझाया कि वह उसकी पीठ पर बैठ जाये, ताकि वह उसे लेकर सुरक्षित उसके घर तक पहुँच जाए.

        दादा जी ने बोला बन्दर भी अपने मित्र की बात का भरोसा कर, पेड़ से नदी में कूदा और उसकी पीठ पर सवार हो गया. जब वे नदी के बीचों-बीच पहुंचे, मगरमच्छ ने सोचा कि अब बन्दर को सही बात बताने में कोई हानि नहीं और उसने भेद खोल दिया कि उसकी पत्नी उसका दिल खाना चाहती है. बन्दर का दिल टूट गया, उसको धक्का तो लगा, लेकिन उसने अपना धैर्य नहीं खोया.


         दादा जी ने एक्टिंग करके बताया तभी बन्दर तपाक से बोला “ओह मेरे मित्र तुमने, यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई क्योंकि मैंने तो अपना दिल जामुन के पेड़ पर ही रख आया हूँहै. अब जल्दी से मुझे वापस नदी के किनारे ले चलो ताकि मैं अपना दिल लाकर अपनी भाभी को उपहार में देकर उसे खुश कर सकूं.”

          मगरमच्छ तो मूर्ख था बन्दर को जैसे ही नदी-किनारे ले कर आया बन्दर ने ज़ोर से जामुन के पेड़ पर छलांग लगाई और क्रोध में भरकर बोला, “ अरे मूर्ख  ,दिल के बिना भी क्या कोई ज़िन्दा रह सकता है ? दिल ही नहीं होगा तो मैं जिंदा कैसे रहूंगा जा, आज से तेरी-मेरी दोस्ती खत्म.”
कहानी जब खत्म हो गई तो बोले बेटी इस कहानी से क्या सीख मिलती है बताओ क्या है वो सीख


         फिर मैं औऱ मोनिका बोले दादा जी इस कहानी से सीख मिलती हैं की

          कोई भी मुसीबत आएँ के उन मुसीबत क्षणों में कभी धैर्य नहीं खोना चाहिए और किसी भी अनजान व्यक्ति से दोस्ती सोच समझकर करनी चाहिए दोस्ती में विश्वास सबसे बड़ी कड़ी होती है इसे ध्यान रखना चाहिए ।
–  मित्र औऱ अपनी मित्रता का सम्मान करना
चाहिए ।

1 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-12-2017) को "राम तुम बन जाओगे" (चर्चा अंक-2821) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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