बचपन का वो प्यारा क्रिसमस

                     
हमारी क्रिसमस टीम के साथी 
                       मेरे बचपन के क्रिसमस की बात है जब मैं यानी की कोपल क्रिस्टियन कान्वेंट विश्वदीप स्कूल में पढ़ा करती थी क्रिस्टियन कान्वेंट स्कूल में पढ़ने के कारण वहां के लोगों का क्रिसमस मनाना देखकर तो मैं भी अपने दोस्तों के ग्रुप के साथ क्रिसमस बहुत धूमधाम से मनाया करती थी हमारी पूरे 10 दस की दिनों की क्रिसमस त्यौहार की जब छुट्टियां होती थी हमारी पड़ोस के बच्चों की पूरी 15 -20 लोगों की टीम हुआ करती थी जिसमें शुभांगी दीदी जो हमारी टीम में सबसे बड़ी थी वो हमारे ग्रुप की टीम लीडर हुआ करती थी हम सभी बच्चे 1 हफ्ते पहले से क्रिसमस मनाने के लिए तैयारी शुरू कर देते थे 15 दिन पहले मीटिंग होती थी सारे ग्रुप के लोगों की सबसे अपने - अपने आइडिया दिया करते थे ऐसा कर सकते है , ये होना चाहिए , ये नहीं कैसे करना है हमारी टीम का सबसे बड़ा लक्ष्य था की हम कम पैसो में जितना अच्छा काम है वो करेंगे पैसो का दुरूपयोग नहीं होगा और मेरे घर में एक चम्पा का पेड़ था हम उसी पेड़ को सजाकर ही क्रिसमस मनाते थे पहले जाकर उस पेड़ का निरीक्षण किया करते थे की उसके डेकोरेशन के लिए क्या -क्या सामान लगेगा , खाने में केक , चिप्स , बिस्किट , कभी ढोकला , तो कभी समोसा , कभी मेरी मम्मी सबके लिए गर्म - गर्म गाजर का हलवा तो कभी सूजी का हलवा बनाती थी या कुछ लाने होगा , कितने लोगो के लिए लेकर आना है , सब कॉपी में लिखते जाया करते थे उसके हिसाब से पैसे इकट्ठा करना शुरू कर देते थे और उन पैसो का हिसाब किताब एक कॉपी मैं दीदी लिखते जाया करती थी फिर उसके हिसाब क्रिसमस के ठीक एक दिन पहले दीदी पास वाली बेकरी में सब खाने की चीजो का ऑर्डर देकर आया करती थी
                     
                         क्रिसमस के 2 दिन पहले से हम में से कुछ लोग दीदी के साथ जाकर क्रिसमस ट्री सजाने के लिए झालर , चमकीले वाले लटकन , मोती की माला, घंटी सब लेकर आते थे और रात को बैठकर सबको देने के लिए अपने हाथ से एक ड्राइंग शीट से ही  क्रिसमस की बधाई देने लिए ग्रीटिंग कार्ड बनाते थे ( उन दिनों ग्रीटिंग कार्ड लेने देने का बहुत प्रचलन हुआ करता था ) रात में एक मीटिंग होती थी अभी भी बता दो कितने लोग आयेंगे तो खाने के सामान में कमी कर देंगे जाकर फिर जिस दिन क्रिसमस होता था उसके पहले ही हम टाइम निश्चित कर लेते थे कि 25 तारीख को सुबह 9 बजे कोपल के घर पर सब पहुँच जायेंगे तैयारी करने के लिए 9 बजे का टाइम हम इसलिए रखते थे क्योंकि स्कूल का होमवर्क भी बहुत हुआ करता था जिसे हम सब दिन में बैठकर पूरा करते थे मेरे घर के आंगन में चम्पा का पेड़ लगा था आंगन में बहुत कम जगह थी वही हमारी स्कूटर और लूना रखी होती थी उसे दूसरी जगह रख देते थे तैयारी शुरू करने से पहले आंगन की उस जगह को झाडू से साफ़ करते थे पानी से धोते थे फिर सब सुबह नौ बजे आते थे और पेड़ को झालर , चमकीले वाले लटकन , गुब्बारे ,के अंदर चोकलेट , मोती की माला, छोटी घंटी , कुछ बड़ी घंटियों से सजाने का काम करते थे जब पेड़ पूरा सजकर तैयार हो जाता था तब ही हम संतुष्ट होते थे ट्री का काम पूरा हो गया है
                     
ये वो चंपा का पेड़ नहीं जिस पर हम क्रिसमस मनाया करते थे पर कुछ ऐसा ही था 
                            पेड़ के दाहिनी तरफ से बाहर जाने के लिए एक दरवाजा था और पेड़ के सामने की तरफ घर के अंदर आने के लिए दरवाजा जब पेड़ का काम हो जाता था तो हम पेड़ की एक डाल से लेकर घर के दरवाजे में एक खीला ठोककर रस्सी पर से एक चादर बाँध देते थे ताकि टीम के लोगो के अलावा कोई और अंदर आ सके और बाहर से किसी को ना दिखे की अंदर क्या कार्यक्रम हो रहा है हमारी
टीम के लोगो को उनके काम पहले ही दीदी बता देती थी कौन क्या करेगा फिर वो काम 25 को सुबह से शुरू कर देते थे एक हफ्ते पहले से क्रिसमस मानाने के लिए जिंगल बेल गीत याद करवाया करती थी और क्रिसमस की सुबह सब फिर से जिंगल बेल प्रेयर दीदी को सुनाया करते थे कंही कोई गलती हुआ करती थी तो फिर वे उस गलती को ठीक करवाकर प्रेयर का वो पार्ट या लाइन याद करवाती थी फिर सब तैयारी हो जाने के बाद हम जाकर बेकरी से नाश्ते का सामान लाने जाते थे और लाकर देखते थे सारा सामना जितना तय किया था लाने के लिए उतना है या नही कम है तो और लेकर आयेंगे , टीम के एक व्यक्ति को ही ये छूट होती थी की वो चखकर देखे की खाने की चीजे ताजी है या नही इस चीज के लिए बहुत झगड़े होते थे की दीदी ने मुझे नहीं दिया चखने के लिए तुझे क्यों दिया इसी बात पर वो दो लोग लड़ने लगते थे पर हमारी शुभांगी दीदी दोनों को यह कहकर शांत करवाती थी अभी बाक़ी काम करो नाश्ता सबको मिलेगा पर शाम को मिलेगा
                    
                       फिर एक जगह नाश्ते का सामान रख देते थे ताकि कंही गम ना हो जाएं ग्रीटिंग कार्ड , भी संभाल कर रख देते थे , चोकलेट्स भी , फिर ये सब काम करके सब लोग 11 बजे घर चले जाते थे होमवर्क करने के लिए यह फिक्स करके की शाम 5 बजे सब लोग कोपल के घर पर आ जाना फिर 3 बजे एक बार कुछ लोग इकट्ठे होते थे ये देखने के लिए की कुछ काम रह तो नहीं गया करने के लिए फिर घर चले जाते थे और 5 बजे सब बढ़िया तैयार होकर आते थे (हम यह तय कर लेते थे की कोई भी गिफ्ट नहीं लेकर आएगा) और यह देखते थे की कितने लोग आ गये है सबके घर लगभग पास - पास ही थे जो नहीं आया होता था तो दूसरा टीम का सदस्य जाकर उस व्यक्ति को बुलाने जाता था
                 
क्रिसमस मस्ती 
                        फिर सबके आने के बाद क्रिसमस का त्यौहार मानना शुरू करते थे इसमें सबसे पहले हम केक काटते थे फिर जिंगल बेल गीत गाकर प्रेयर करते थे और उसके बाद हम एक दुसरे को ग्रीटिंग कार्ड देकर हाथ मिलाकर गले मिलकर क्रिसमस की बधाई देते थे उसके बाद कभी अन्ताक्षरी तो गीत ड्रमशारज , तो कभी कविता सुनाता था , कोई अपना गाना सुनाता था तो कोई जोक सुनाता था हम ये सब इसलिए करते थे क्योंकि इससे क्रिसमस के टाइम पर थोड़ा मनोरंजन हो जाता था और लोगो को अपनी कला को दूसरो तक पहुंचाने का एक सुंदर रास्ता मिल जाता था जब ये सारे मनोरंजन वाले काम हो जाते थे तो फिर टीम के लोग नाश्ता निकालकर सबको देते थे सब नाश्ता करते थे कुछ लोग क्रिसमस पार्टी में सब इसलिए आते क्योंकि एक से एक टेस्टी नाश्ता और केक मिलता था हमारी टीम से अलग कोई और अंदर आना चाहे ये हम लोगो को बिलकुल पसंद नहीं था पर हमारे मम्मी पापा दया व प्रेम दिखाकर कहते थे आने दो बेटा उसे भी वह देख ले तुम कैसे मनाते हो क्रिसमस
फिर सबके जाने के टाइम हो जाता था तो आख़िर में सबको दीदी चोकलेट देती थी चोकलेट लेने देने के बाद सब जो साफ़ करने का काम होता था वो करते थे उसके बाद ही अपने घर जाते थे इस क्रिसमस के उत्सव में कभी - कभी कुछ यादगार लम्हे भी आ जाते थे जो उस वक्त बहुत टेंशन देने का काम करते थे जैसे एक बार केक खराब आ गया था जिसकी चखने की ड्यूटी थी उसने चखा और दीदी से कहा दीदी वो कड़वा और बासी लग रहा है उसके कहने पर दीदी ने भी चखकर देखा तो दीदी ने भी बोला हाँ ये केक खराब हो गया है फिर तुरंत ये डिसाइड किया की दूसरा केक लेकर आयेंगे तो सबने कहा दीदी जमा किये हुए पैसे तो खत्म हो गये है तो दीदी ने बोला कोई बात नहीं मैं अपने पैसो से ले आती हूँ इस तरह फिर नया केक आया
               
क्रिसमस पार्टी के बाद का फोटो सेशन 
                         ऐसी ही एक बार बहुत सारे लोग बाहर चले गये थे तो जितने लोग थे उतने लोगो ने क्रिसमस मनाया , कभी ऐसा भी हुआ की हम यहाँ अपनी क्रिसमस पार्टी की प्लानिंग कर रहे है तो कुछ गुप्त खबरों से पता चलता था की टीम के कुछ लोग अपनी अलग क्रिसमस मनाने की प्लानिंग कर रहे है सबका दिमाग ख़राब हो जाता था की वो लोग ऐसा क्यों कर रहे है तो फिर टीम के उस सदस्य को बुलाकर पूछते थे की वो क्यों अलग प्लानिंग कर रहा है जब अपन सब साथ में मना रहे है तो वो बताता था की उसको यहाँ जो वो काम करना चाहता है करने नहीं मिलता है इसलिए हम अपना क्रिसमस अलग मना रहे है और वो व्यक्ति हम लोगो को धमकी भी दे देता था की देखना हम आप लोगो से अच्छा क्रिसमस मनाएंगे बाद पता चलता था कि उस व्यक्ति से प्लानिंग नहीं करते बन रहा है और जितने लोग उसकी पार्टी में आने वाले थे सब यहाँ हमारी पार्टी में आ रहे है तो फिर उस वो कैंसिल कर देता था अपनी अलग पार्टी मानना और हमारे साथ ही मनाता था पार्टी फिर शुभांगी दीदी से सॉरी बोलकर माफी भी माँगी जाती थी की अब ऐसा नहीं करेगे , कभी टीम के किसी सदस्य की तबीयत खराब हो जाती थी तो भी घर पर उसका नाश्ता टीम का दूसरा सदस्य पहुंचा देता था ताकि उसे खराब ना लेगे की सब खा रहे है मुझे नहीं दिया
, ऐसा भी टाइम आया है जब एक बार मैं भंडारा अपने द़ादा जी के घर पर थी वहां मानाया था अपनों के साथ क्रिसमस  ऐसी ही ना जाने और भी कितने ऐसे कारण रहे होंगे जिनके कारणों से हमारी क्रिसमस पार्टी की यादे और मजेदार बन जाती थी फिर इस तरह 31 दिसम्बर आ जाता था और सब मौज मस्ती करते हुए अपने - अपने परिवार के लोगो के साथ नया साल मनाते थे और इन बाक़ी बीच के दिनों होमवर्क पूरा करते हुए क्रिसमस की छुट्टियों के दिन खत्म हो जाते थे फिर स्कूल शुरू हो जाता था
                   
                       दोस्तों हमारी टीम के लोगो ने करीब -करीब 6 -7 साल क्रिसमस मनाया 1997 se 2003 या 2004 तक कब तक मनाया ठीक कुछ याद नहीं पर मित्रों क्रिसमस और दोस्तों की साथ मौज मस्ती , आपसी एकता , एक दुसरे के साथ सहयोग से काम करना , एक दुसरे की फ़िक्र , खेल , होमवर्क यादे , तयारियाँ , मिल बांटकर रहना , खाना खेलना , रूठना मनाना , लड़ना झगड़ना फिर आंसू बहाने के बाद फिर एक हो जाना ना जाने तमाम कितने सारी ऐसी खट्टी - मीठी प्यारी - प्यारी क्रिसमस और मेरे बचपन की यादें है जो आज मेरे दिमाग की मेमोरी के खज़ाने में कैद है
आज एक बहुत अच्छी बात याद आ रही है
                       एक अफ़सोस रह गया की काश उन दिनों याद रहता कोई तस्वीर ही ले लेते उन दिनों की जिन दिनों संगी साथी संग क्रिसमस मनाया करते थे आज लगता है हम सबकी मेमोरी सबसे बड़ी एल्बम है जिसमें ना जाने कितने सारे पल कैद है आज तस्वीरे नहीं है क्रिसमस पार्टी की पर हाँ मेरी टीम के लोगो के है एक तस्वीर तो क्या उन पलों की यादें तो साथ है जो सबसे अनमोल है सबसे बड़ी आज भी हम सब एक दुसरे से सम्पर्क में है मेरे दोस्तों के नाम शुभांगी दीदी हमारी टीम लीडर ,कोपल यानी मैं ,डोली ,चीकू भाई उपासना ,प्रणव ,अजहर ,रोशनी ,ज्योती दीदी ,चम्मू ,शेरू ,रुपाली दीदी,जयश्री दीदी ,जागृति दीदी ,प्रिया ,गौरव ,शालू ,राजा सल्लू दीदी ,शिबू दीबू दीदी , प्रिंसी , अनीता दीदी और भी लोग थे मगर अब वक्त के साथ उनके नाम याद नहीं है  
उन दिनों में आज का पता नहीं था
बचपन की राहें सबकी इतनी बदल जायेंगी
लिखने बैठुंगी तो आज यादें इतनी याद आयेंगी



इन्ही क्रिसमस की यादों के साथ आप सभी दोस्तों को मेरी क्रिसमस 

1 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (27-112-2017) को "सर्दी की रात" (चर्चा अंक-2830) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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