महिलाओं के लिए घर बैठे रोजगार के कुछ टिप्स


     
      आज कल नौकरी मिलना बहुत आसान नही है की बस फॉर्म भरा परीक्षा दी और हो गया नौकरी में सिलेक्शन किसी भी व्यक्ति से सुनो क्या कर रहे हो इन दिनों बस उस व्यक्ति का एक ही जवाब होता है नौकरी ढूढ़ रहे है , सभी कंपनीयो में नौकरी के लिए 10 सीट खाली होंगे तो 100 लोग उन सीटों के लिए परीक्षा या इंटरव्यू देते हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए भी नौकरी का क्षेत्र बहुत ही मुश्किल होते जा रहा है।
           ऐसे समय में सबसे बेहतर उपाय है एक छोटी जी पूंजी लगा कर घर पर अपना स्वयं का एक व्यापार शुरू करना। ऐसे बहुत से  बहुत से छोटे उधोग है जिनसे महिलाएं घर पर रहकर भी अपना काम करके पैसे कमा सकती है यह महिलाओं के लिए ज्यादा बेहतर व्यापार / उद्योग के तरीके हैं परन्तु अगर पुरुष चाहें तो वे भी इनमें से ज्यादातार उद्योग को कर सकते हैं।
             भारत में ज्यादातर महिलाएं गृह्नीयाँ  है जो परिवार को सम्भ्ह्लने के कारण बाहर जाकर काम नहीं कर पाती है हैं । आज जब महिलाएं इन तरीकों को पढ़ेंगी इन पर विचार करेंगी तो वे घर पर रहकर करने वाले कामों को करने की इच्छा उनके मन में जरुर आयेगी ।
          
     
         आज मैं भी घर बैठे काम कर रही हूँ पिछले कुछ सालों से और मैं 1 महीने के हिसाब कम से कम 1 हजार रु घर पर बैठे हुए काम करते हुए कमा लेती हूँ  मुझे कम्प्यूटर का अच्छा ख़ासा ज्ञान है जिसके माध्यम से मैं लोगों की मदद करती है मेरा काम ऐसा है की आजकल तो परीक्षाओं के फॉर्म ऑनलाइन भरकर जमा किये जाते है जिन स्टूडेंट्स के पास कम्यूटर नहीं है उन्हें ऑनलाइन एंट्री करवाने के लिए बहुत भटकना पड़ता है मैं घर पर बैठे हुए ऑनलाइन फ़ार्म भरकर जमा करने का काम उन्हें करके देती हूँ बस मुझे जरूरत होती है उनके पूरे डाक्यूमेंट्स और फोटो की , बस इतनी जानकारियाँ मिलने के बाद मेरा काम हो जाता है और मुझे वो छात्र काम के हिसाब से पैसे दे देते है बस मैं स्कैनिग का फोटो एडीटिंग के पैसे लेती हूँ और अपनी स्वयं की मेहनत का कोई मेहनताना कुछ नहीं । मित्रों अगर आपको भी जरूरत है की कोई आपको भी ऑनलाइन फ़ार्म की एंट्री करवानी है तो मुझसे जरुर कोंटेक्ट करे ।

          मैं आपको घर बैठे किया जाने सकने वाले उद्योगों के बारे में बता रही हूं जिनको महिलाएं घर बैठे शुरू कर सकती हैं और अपने पैरों में खड़ी हो सकती हैं। क्योंकि बहुत जरूरी है की अगर उनके पास हुनर है कुछ करने का माद्दा है तो वे इस हुनर को बेहतर ढंग से प्रयोग करे ।
सोचा नहीं जा सकता है की आज नौकरी से ज्यादा लोग घर बैठे काम करते है और पैसे कमा सकते है
तो चलिए जानते हैं क्या हैं वो बेहतरीन उद्योग के तरीके

ट्यूशन के द्वारा
ऐसी बहुत सारी महिलाएं हैं जो पढ़ी लिखी हैं पर वो कोई नौकरी नहीं कर रही हैं। उनमें से कई फीसदी महिलाएं हैं जिन्हें पढ़ाने का शौक होता है। जब आपको खाली समय मिलता है उस खाली समय में आप घर पर कुछ बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया जा सकता हैं। इससे उनके पढ़ाने की इच्छा भी पूरी होगी और घर के लिए वो कुछ पैसे भी कमा सकते हैं। 2 बच्चों को पढ़ाना शुरू करके आप ज्यादा बच्चों को पढ़ा सकती है क्योंकि बच्चों को आपका पढ़ाना अच्छा लगेगा तो वे अपने साथियों को बताएग और ऐसा होने से आपके पास ज्यादा बच्चे आयेंगे और आप है  दो तीन महिलाएं मिलकर भी ट्यूशन सेंटर शुरू कर सकते हैं।

ब्लॉग्गिंग
आज बहुत से लोग ब्लॉग्गिंग की दुनिया से जुड़े हुए है जैसे की स्वयं मैं खुद , बहुट सी महिलाओं को लिखना अच्छा लगता है। वो चाहें तो अपना खुद का एक ब्लॉग भी शुरू कर सकते हैं जिसमें वो अपने ज्ञान के अनुसार पोस्ट लिख सकते हैं। ब्लॉग या वेबसाइट के माध्यम से बहुत तरीकों से पैसे कमाए जा सकते हैं, जैसे – आप अपने ब्लॉग पर  विज्ञापन, एफिलिएट मार्केटिन लगाकर पैसे कमा सकती है ।

फ्रीलांसर
आप घर बैठे ऑनलाइन freelancing कर सकते हैं। कुछ महिलाओं को कवितायेँ या लेख लिखने का शौक होता है तो कुछ को वेब डिजाइनिंग का काम आता है। वो महिलाएं इन्टरनेट के माध्यम से कई ऑनलाइन जॉब्स या फ्रीलांसिंग वेबसाइट पर जाकर काम कर सकते हैं। सबसे खास बात है इसको शुरू करने के लिए उन्हें किसी  भी पूंजी की आवश्यकता नहीं है और वह घर बैठे freelancing कर सकते हैं।

मिठाई का व्यापार
बहुत सी महिलाओं को मिठाई बनाने का बहुत ज्यादा शौक होता है या फिर वे घर पर ही आने वाले व्रत त्यौहार लज़ीज़ मिठाइयाँ बनाती हैं। पर वो महिलाएं अपने घर में अपना काम करने के साथ-साथ मिठाई बनाने का उद्योग भी शुरू कर सकते हैं और अच्छा पैसा कमा सकते हैं। इससे आप अपने घर के खर्चे के लिए कुछ पैसे भी जमा कर सकते हैं और इससे आपका ज्ञान उस क्षेत्र में और बढेगा।

आर्ट और क्राफ्ट की दुकान
कुछ महिलाओ को स्कूल कोलेज या पहले से ही आर्ट और क्राफ्ट का ज्ञान होता है। सोचिये किसी को सुन्दर पर्स या झोला बनाना आता है तो किसी को अच्छा बास्केट या अलग-अलग सामानों से सुन्दर आर्टिफीसियल गुलदस्ते या किसी को चिकनी मिटटी की मदद से सुन्दर मूर्ति या खिलौने , आप अपने ज्ञान और सूझ बूझ के अनुसार सामग्री बनाने का सामान थोक व्यापारी से लाकर व्यापार शुरू कर सकते हैं। या फिर आप अपने नाम से कार्ड बनवा ले और अपने पहचान वालों को जिन्हें जरूरत हो उन्हें आप बनाकर दे सकती है ।

बेकिंग करना
बहुत सी स्त्रियों को बेकिंग का शौक होता है वे कभी ब्रेड या टोस्ट बनाती है तो कभी केक कभी चोकलेट्स आप घर पर ही अपनी छोटी से बेकरी भी खोल सकती है इस व्यापार को महिलाएं बहुत ही कम लागत में शुरू कर सकतीं है और इसमें बहुत ही ज्यादा मुनाफा होता है। इसमें कप केक, ब्रेड, टोस्ट जैसी चीजें भी आप बना सकते हैं। आप अपनी मित्रो , रिश्तेदारों , पहचान वालों को उनके बर्थडे , सालगिरह या छोटे ओकेजेंश्स पर केक , पेस्ट्री, टोस्ट और दुसरे बेकरी आइटम बनाकर दे सकती है ।

घर बैठे सिलाई कढ़ाई
बहुत सारी महिलाओं को सिलाई कढ़ाई बुनाई का शौक होता है। सिलाई कढ़ाई बुनाई या टेलरिंग जानने वाली महिलाएं जिन लोगो को ये कला सीखनी है उन्हें आप टेलरिंग क्लास दे सकती है और आप अपना छोटा सा एक टेलरिंग उद्योग शुरू कर सकती है जैसे की अगर आपको अच्छी सिलाई आती है तो आप अपना बुटिक खोलकर अपने पहचान के लोगो को उनके ब्लाउज, स्लावार सूट और अन्य ड्रेस मेटेरियल सिलकर दे सकती है ।

अपनी छोटी सी डांस क्लास खोलना
आजकल तो हर किसी को डांस सिखने की इच्छा होते है क्योंकि बहुत से फंक्शन्स होते है जिनमें लोग डांस करते है शादी , संगीत , बर्थ डे , या और कोई ओकेजन पर आप घर पर लोगो को डांस करना सीखा सकती है जैसे जुम्बा , बोलीवुड डांस , एरोबिक्स और अन्य डांस आप सिखाते उए खुद को इम्प्रूव भी कर सकती है डांस सिखाकर पैसे कमा सकती है

एफिलिएट मार्केटिंग
ये एक और ज़बरदस्त व्यापार का तरीका है जिससे महिलाएं घर बैठे बिना किसी लागत के पैसे कमा सकते हैं। इसमें आपको ऑनलाइन किसी भी वेबसाइट या कंपनी का सामन बिकवा कर उनसे कमीशन प्राप्त कर सकते हैं। आज करज्यादातर शौपिंग वेबसाइट इस सर्विस को प्रदान कर रहे हैं जैसे ebay, amazon, flipkart

अपनी किताब ऑनलाइन पब्लिश करना
कुछ लोगों को किताबें लिखने का शौक होता है पर उन्हें इसका सही फायदा नहीं मिल पाता। ऐसे में उनके लिए amazon के एक ज़बरदस्त site है – https://kdp.amazon.com/जहाँ वो चाहे तो अपनी किताबों के PDF file को Publish कर सकते हैं। उन किताबों के बिकने पर आपको amazon KDP पैसे देता है। बड़े-बड़े लेखक amazon kdp जैसी वेबसाइट की वजह से ही करोड़ पति बने हैं।

यूट्यूब विडियो
आज एक दिन में यूट्यूब विडियो बनाना ऑनलाइन करियर का एक माध्यम बन चूका है। ऐसे बहुत सारे Youtubers हैं जो घर बैठे YouTube पर अपने Video Upload करके पैसे कमा रहे हैं। महिलाओं के लिए YouTube एक बहुत ही अच्छा माध्यम है जहाँ वो अपने Knowledge को Share करके Popular भी बन रहे हैं और अच्छा पैसा भी कमा रहे हैं। ऐसे बहुत से टॉपिक है जिन पर महिलाएं अपना वीडियो बना सकती है क्योंकि लोगो तो सर्च करते ही रहते है जैसे सेहत से जुड़ा टोपिक , मोटिवेशनल टोपिक ऐसे कई टोपिक है जिन पर वो अपना वीडियो बनाकर पैसे अर्जित कर सकती है  

स्कूल के प्रोजेक्ट , अस्सिंग्मेंट , नोट्स बनाना
अगर आपको डायग्राम बनाना , मोडल बनाना , आता है तो आप स्कूल के बच्चों को उनके स्कूल के प्रोजेक्ट्स , मोडल बनाकर दे सकती है इसकी बहुत डिमांड है इन दिनों अगर आपकी लेखनी अच्छी है तो आप उनके अस्सिंग्मेंट , नोट्स लिखकर दे सकती है और अच्छे पैसे कमा सकती है

स्वादिष्ट व्यंजनों का टिफिन
अगर आपको कुकिंग का शौक है और अच्छा खाना बना लेती है तो आप जरुरतमन्दो को अच्छा और स्वादिष्ट व्यंजनो का टिफिन भी दे सकती है क्योंकि कुछ लोग ऐसे है जिन्हें खाना बनाना नहीं आता है जैसे पीजी, होस्टल के बच्चे जो घर से बाहर रहकर पढाई करते है उनके लिए ये सबसे जरूरी चीज है इस हुनर के माध्यम से आप पैसे कमा सकती है

मेहंदी लगाना
बहुत सी महिलाओं को अच्छी महेंदी लगाना आता है वे महिलाएं ऑर्डर लेकर लोगो को मेहंदी लगा सकती है क्योंकी ऐसे बहुत से ओकेजेंश्स होते है जिनमें लोग मेहंदी लगाते है बहुत से पर्व, व्रत शादी आदि ऐसे टाइम में आप उन्हें मेहंदी लगा सकती है और आप अपना छोटा सा ग्रुप बना सकती है अपनी सहेलियों के साथ मिलकर भी इस वर्क को पूरा कर सकती है और पैसे कमा सकती है


इन तरीकों से आप घर पर रहते हुए अपने हुनर का प्रयोग कर सकती है और पैसे कमा कमाकर अपनी और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकती है

जैसा बोलेंगे वैसा ही बन जायेंगे अपने बातचीत करने का तरीका सुधारे



 लोगो से अपने बातचीत करने के तरीके को कैसे सुधारे


                    हम अक्सर सोचते है की हम जो कुछ भी बोलते है इससे सामने बैठे व्यक्ति को हमारी पर्सनालिटी का प्रभाव नहीं पड़ता है जी नहीं मित्रों हम जब किसी व्यक्ति से बात करते है तो उसका सीधा सम्बन्ध हमारे व्यक्तित्व से होता है जिस व्यक्ति से समक्ष बैठकर हम कम्यूनिकेट या बातचीत कर रहे होते है वह ना सिर्फ हमारी बातों पर ध्यान देते है बल्कि वह हमारे व्यक्तित्व पर ,हावभाव पर ,हमारी सोच पर , बॉडी लैंग्वेज पर, साथ ही सामने बैठा व्यक्ति यह भी ध्यान देता है हम उसकी बातों को कितना ध्यान से सुन रहे है
    
                 ये सभी बातों पर वह व्यक्ति पूरा - पूरा ध्यान देता है तभी तो वह व्यक्ति हमारी बातो और बात करने के अंदाज से ही यह जान जाता है की ये व्यक्ति प्रभावशाली व्यक्तित्व का है या नही कभी - कभी हिलते हुए बातें करते है ओवर कॉन्फिडेंस में , या हम सामने बैठे व्यक्ति की ओर बिना देखे उसकी बाते सुनते है
ये सभी बातें दर्शाती है की हमें अपने बातचीत करने के तरीके यानी कम्यूनिकेशन स्किल्स को सही करना है
improve communication skills tips

               बहुत सारे रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने 2000 से भी ज्यादा कौशल या स्किल्स(skills) को जागृत किया है जिनकी मदद से हर किसी कंपनी या इंडस्ट्री में लोग काम सही तरीके से करते हैं। अपने कंपनी या इंडस्ट्री के अनुसार बातचीत करने का सही कौशल होना बहुत आवश्यक होता है। परंतु इन सभी कौशल या स्किल्स में से संचार कौशल या संवाद कौशल यानी कैसे किस व्यक्ति से बात करना है का तरीका आना किसी भी कंपनी में सफलता पाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है। हम जैसे अपने घर में बाते करते है दोस्तों या अन्य किसी व्यक्ति उस तरह से हम अपनी कम्पनी के लोगो से बात नहीं कर सकते है आज के लगभग सभी बड़ी कंपनियां इंटरव्यू में सबसे पहले यह देखती है कि नौकरी के लिए आवेदन किए हुए व्यक्ति का कॉन्फिडेंस और बात करने का तरीका कैसा है?
              सभी ने एक चीज पर गौर किया होगा कि जितने भी महान नेता , कवि या फिर हमारे शिक्षकों को देख लीजिए उनके बोलने का तरीका बहुत ही बेहतरीन होता है जिससे उनकी बात लोगों के साथ जुड़ पाती है। उनकी बातों में ऐसी मधुरता और प्रेरणा होती है जिससे हर व्यक्ति उनकी बातों को और सुनने की इच्छा करते है।
अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स कैसे बढ़ाएं
अपने संचार कौशल को बेहतर बनाने के लिए कुछ मुख्य चीजों पर ध्यान देना आवश्यक होता है।-
1. अच्छे और ध्यान से सामने वाले की बात सुनें
हर व्यक्ति यह चाहता है वः जो भी बोल रहा है या जिससे बात कर रहा है वह व्यक्ति उनकी बातों को सुनें। सबसे मुख्य बात तो यह है कि हमें पहले दूसरों की बातों को अच्छे से सुनना आना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर आप किसी की बातों को अच्छे से नहीं सुनेंगे तो जवाब अच्छे से कैसे दे पाएंगे? जब कोई व्यक्ति आपसे बात करता है तो इस बात का ध्यान रखें कि आप जो भी बात कर रहे हैं वह आपके लिए महत्वपूर्ण होना चाहिए। आपका ध्यान उस व्यक्ति बातचीत पर ही फोकस होना चाहिए। कभी भी किसी से बात करते समय कोई दूसरा काम जैसे फोन पर बात करना, कोई ईमेल भेजना या कोई भी ऐसा काम जिससे दो लोगों के आपस में बातचीत या संचार बिगड़े वैसा काम नहीं करना चाहिए।
2. आप किससे बात कर रहे हैं समझें
हर व्यक्ति से बात करने का एक अलग तरीका होता है। आम बात तब होती है जब आप अपने किसी दोस्त से बात करते हैं या उससे ऑनलाइन चैट कर रहे होते हैं। अगर आप अपनी कंपनी के बॉस से बात कर रहें है या किसी महान व्यक्ति से ऐसे समय में आपको सोच समझ कर उनसे बात चाहिए। अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए पहले से ही सोच ले आपको उनसे क्या बात करना है और क्या नहीं कम से कम शब्दों में बात करे तो बेस्ट है , एक अच्छा संचार कौशल वाला व्यक्ति हमेशा आपनी बातों को सामने वाले व्यक्ति के दिमाग तक पहुंचाने की कोशिश करता है।
3.  सही बॉडी-लैंग्वेज ज़रूरी
अलग-अलग इंडस्ट्री में कई प्रकार के काम होते हैं कुछ जगहों पर जैसे कम्पनी में , मीटिंग में आमने-सामने बैठकर कॉन्फिडेंस से बात करना होता है तो ज्यादातर समय विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अन्य लोगों से बात करना होता है एसे में बॉडी लैंग्वेज का ठीक होना बहुत आवश्यक होता है। हमेशा सीधे देख कर बात करें सामने बैठे व्यक्ति की आँखों में देखकर बात करे अगर आपका ध्यान कहीं और तो सामने वाले व्यक्ति बुरा प्रभाव पड सकता है और सामने वाले की बात को ध्यान से सुनें। कभी भी हिलते हुए हाथ पैर हिलाते हुए बात ना करें , सही बॉडी लैंग्वेज रखने से कॉन्फिडेंस बढ़ता है और संचार कौशल में विकास होता है।
4. पावरपॉइंट पर प्रेजेंटेशन देना बंद करें
अब बड़ी बड़ी कंपनियां जैसे Apple और Facebook ने अपनी मीटिंग में पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन को बंद करना शुरू कर दिया है। अब वह ज़माना आ चूका है जब लोग बिना पॉवरपॉइंट के अपने शब्दों और दिमाग के माध्यम से अपना प्रेजेंटेशन दें। हलाकि की कुछ जगहों पर इसकी आवश्यकता होती है परन्तु सभी जगहों पर इसका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। जब आप किसी चीज को अपने मन में याद रखकर लोगों के सामने व्यक्त करते हो तो आपका संचार कौशल और बेहतर बनता है।
People who know what they’re talking about don’t need PowerPoint – Steve Jobs
यहां तक की स्टीव जॉब्स जो की Apple के CEO हैं उनका कहना है जिन लोगों को यह नहीं पता होता है कि वह किस विषय पर बात कर रहे हैं उनको पॉवरपॉइंट की आवश्यकता होती है
5. मैसेज को ध्यान से पढ़ कर देखें और भेजें
कभी-कभी हम अपने मैसेज और ईमेल भेजने में बहुत लापरवाही करते हैं। अगर आप अपने किसी दोस्त या घरवालों को मैसेज भेज रहे हैं और कुछ गलती हो गया है तो उसमें कोई बात नहीं आप दोबारा मैसेज भेज सकते हैं। परंतु अगर आप अपनी कंपनी का कोई ऑफिशियल मैसेज भेज रहे हैं तो भेजने से पहले एक दो बार अच्छे से जांच कर लें कि मैसेज सही तरीके से लिखा गया है या नहीं? कई बार गलत मैसेज भेज देने की वजह से लोगों को अपनी नौकरी तक गवानी पडती है , एक सही सोचा समझा मैसेज भेजना अच्छे कम्युनिकेशन स्किल्स या संसार कौशल का उदाहरण है।
6. दूसरों से सही प्रतिक्रिया लें
बहुत बार कुछ ऐसा होता है कि हमारे दोस्त, परिवार के लोग, या ऑफिस के कर्मचारी हमारी कुछ गलतियों के विषय में बताते हैं। ऐसे समय पर कुछ ऐसे लोग होते हैं जो हो उनकी बातों का बहुत बुरा मानते हैं उन्हें उल्टा जवाब देते हैं जो की सही बात नहीं है। अगर लोग हमारी गलतियां निकालते हैं हमारा कर्तव्य बनता है कि हम उन गलतियों को समझें और उन्हें सुधारें। हमें अन्य लोगों से सही और ईमानदारी से प्रतिक्रिया लेना चाहिए जिससे हम स्वयं को एक बेहतर इंसान और अपने कम्युनिकेशन स्किल्स को बढ़ा सकें।
7. सभी का सम्मान करें
चाहे कोई भी व्यक्ति हो आपका सीनियर हो, कोई छोटा कर्मचारी हो,या कोई छोटा चाय वाला हो, आपको हर किसी व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए। ऐसा करने से ना सिर्फ स्वयं के मन में एक सकारात्मक भावना उत्पन्न होती है बल्कि हर किसी के दिल में आपके लिए सम्मान की भावना उत्पन्न होती है।  घमंड करने वाला इंसान कभी भी अपने जीवन में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता है। क्योंकि जो व्यक्ति जिस तरह से लोगो से बात करता है उसकी छवि वैसी ही बनती जाती है  कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते है जो किसी से गुस्से में रूखे स्वर में बात करता है तो वो व्यक्ति लोगो के बीच कभी अपने आपको सही सिध्द नहीं कर पाता है लोगों का सम्मान करना और सभी लोगों से प्रेम के साथ बात करना कम्युनिकेशन स्किल्स को बेहतर बनाने का सबसे बड़ा हिस्सा है।
8. हमेशा मुस्कुरा कर सबसे बात करें
चेहरे पर हल्की स्माइल देखकर आपका बिगडी से बिगड़ी बात भी बन जाती है हमेशा किसी से भी बात करते समय मुस्करा के बात करें इससे एक सकारात्मक माहौल बनता है। व्यक्ति को इससे सामने वाले व्यक्ति को आपसे बात करने में आसानी होती है और दो लोगों के बिच सही और पूर्ण वार्तालाप हो पाता है। मुस्कुराते हुए बात करना एक अच्छे संचार कौशल का उदाहरण है।
9. महत्वपूर्ण बिन्दुओं से शुरू करें और अंत भी 
अपने हर एक मीटिंग में अपने मुद्दे और विषयों के महत्वपूर्ण पॉइंट्स को पहले उठाये और उन चीजों का हल निकालने की पूर्ण कोशिश करें। अच्छे कम्युनिकेशन स्किल्स वाले व्यक्ति हर मुख्य बिंदु को अच्छे से सभी दर्शकों के समक्ष रखते हैं और उन्हें समझा पाते हैं। हर मीटिंग को शुरू करते और अंत करते समय महत्वपूर्ण बिन्दुओं का ज़िक्र करना इसलिए आवश्यक होता है क्योंकि इससे सामने बैठे दर्शकों या लोगों को सभी बिंदु याद रहते हैं।
10. समय के महत्व को समझे 
आज के इस युग में पैसे का मूल्य कम और समय का मूल्य ज्यादा हो गया है। एक बात हमेशा याद रहें जो व्यक्ति समय के मूल्य को समझता है वही जीवन में सफल होता है। एक अच्छा कम्युनिकेशन स्किल वाला व्यक्ति बनने के लिए आपको हमेशा समय के अनुसार अपनी बातचीत को ख़त्म करना चाहिए और कभी भी बेकार की बातचीत में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। कुछ लोगो को इसलिए पसंद नहीं किया जाता है क्योंकि वो व्यक्ति समय पर अपनी बातचीत नही खत्म करता है इसलिए समय का ध्यान रखते हुए कम से कम शब्दों में अपनी करना चाहिए

अपने आपको दूसरे व्यक्तियों के सामने इस तरह प्रस्तुत करे की आपकी बातों से वह हमेशा प्रभावित होता रहे । और आप उस व्यक्ति के लिए एक उदाहरण बन जाए । 

स्त्रियों को पढ़ाने वाली पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले

           




           आज जो हम स्त्रियाँ शिक्षा के क्षेत्र में इतने आ बढ़ पा रही है वह किसकी वजह है अगर वे स्त्रियों को शिक्षित करने का काम नहीं करती तो आज हम भी शिक्षा की उच्चाईयों तक नहीं पहुंच पाते सावित्रीबाई एक ऐसी समाजसेवी जिन्होंने समाज के पिछड़े वर्ग खासतौर पर महिलाओं के लिए अनेक कल्याणकारी काम किये .उन्हें उनकी मराठी कविताओं के लिए भी जाना जाता है.
सावित्रीबाई भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्रियों के अधिकारों एवं शिक्षा के  कार्य किए। सावित्रीबाई भारत के प्रथम कन्या विद्यालय में प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है। 1852 में उन्होंने अछूत बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की।
             सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगाँव नामक स्थान पर  हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में मात्र नौ वर्ष की आयु में ही उनका विवाह बारह वर्ष के ज्योतिबा फुले से हुआ।
           सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था।
'सामाजिक मुश्किलें

सावित्री जब छोटी थी तब एक बार अंग्रेजी की एक किताब के पन्ने पलट रही थी, तभी उनके पिताजी ने यह देख लिया और तुरंत किताब को छीनकर खिड़की से बाहर फेंक दिया, क्योंकि उस समय शिक्षा का हक केवल उच्च जाति के पुरुषों को ही था, दलित और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करना पाप था.उन्होंने न केवल लोगों की गालियाँ सहीं अपितु लोगों द्वारा फेंके जाने वाले पत्थरों की मार तक झेली। स्कूल जाते समय सावित्रीबाई फुले पर कूड़ा-करकट, कीचड़ व गोबर ही नहीं मानव-मल भी फेंक देते थे। इससे सावित्रीबाई के कपड़े बहुत गंदे हो जाते थे अतः वो अपने साथ एक दूसरी साड़ी भी साथ ले जाती थीं जिसे स्कूल में जाकर बदल लेती थीं। इस सब के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी व स्त्री शिक्षा, समाजोद्धार व समाजोत्थान का कार्य जारी रखा।
स्त्रियों को शिक्षित करने के लिए उन्हें लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में धर्म के ठेकेदार व स्त्री शिक्षा के विरोधी उनपर गंदगी, कीचड़, गोबर फेंकते थे उन्हें गालियाँ देते थे की वे लडकियों को पढ़ाने के लिए स्कूल क्यों जाती है रास्ते भर सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गन्दी सादी बदलकर दूसरी साडी पहन लेती थी । सावित्री जी अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देती हैं। आज से 160 साल पहले बालिकाओं के लिये जब स्कूल खोलना पाप का काम माना जाता था कितनी सामाजिक मुश्किलों से खोला गया होगा देश में एक अकेला बालिका विद्यालय।
सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं। हर बिरादरी और धर्म के लिये उन्होंने काम किया।
विद्यालय की स्थापना
सावित्री बाई ने 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ उन्होंने एक विद्यालय की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पाँच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। सरकार ने उनके इस सार्थक काम के सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 के समय में लडकियो के लिए विद्या;य चलाबा बहुत मुश्किल था क्योंकि उस समय लोगों की यही सामाजिक धारणा थी की पढ़ने तो लड़के स्कूल जाते है लड़कियों को नहीं पढ़ाना है उनका तो जल्दी विवाह करना है और लडकियो को घर सम्भालना है रहकर खाना बनाना है परन्तु सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि उन्होंने पुणे जैसे शहर में दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी इन्तेजाम किया, । सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं। उन्होंने हर बिरादरी और धर्म के लिये काम किया।

स्वयं हुईं शिक्षित और छेड़ी महिला-शिक्षा की मुहीम 

·         महात्मा ज्योतिबा फुले स्वयं एक महान विचारक, कार्यकर्ता, समाज सुधारक, लेखक, दार्शनिक, संपादक और क्रांतिकारी थे। सावित्रीबाई पढ़ी-लिखी नहीं थीं। शादी के बाद ज्योतिबा ने ही उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया। बाद में सावित्रीबाई ने ही दलित समाज की ही नहीं, बल्कि देश की प्रथम  शिक्षिका होने का गौरव प्राप्त किया। उस समय लड़कियों की दशा अत्यंत दयनीय थी और उन्हें पढ़ने लिखने की अनुमति तक नहीं थी। इस रीति को तोड़ने के लिए ज्योतिबा और सावित्रीबाई ने सन् 1848 में लड़कियों के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। यह भारत में लड़कियों के लिए खुलने वाला पहला स्त्री विद्यालय था। भारत में नारी शिक्षा के लिये किये गये पहले प्रयास के रूप में महात्मा फुले ने अपने खेत में आम के वृक्ष के नीचे विद्यालय शुरु किया।यही स्त्री शिक्षा की सबसे पहली प्रयोगशाला भी थी, जिसमें सगुणाबाई क्षीरसागर व सावित्री बाई विद्यार्थी थीं। उन्होंने खेत की मिटटी में टहनियों की कलम बनाकर शिक्षा लेना प्रारंभ किया।

 सचमुच जहाँ आज भी हम लैंगिक समानता (gender equality) के लिए संघर्ष कर रहे हैं वहीं अंग्रेजों के जमाने में सावित्रीबाई फुले ने एक दलित महिला होते हुए हिन्दू समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जो संघर्ष किया वह अभूतपूर्व और बेहद प्रेरणादायक है. ऐसी महान समाजसुधारक को शत-शत नमन!

विधवा पुनर्विवाह के लिए संघर्ष 

स्त्री शिक्षा के साथ ही विधवाओं की शोचनीय दशा को देखते हुए उन्होंने विधवा पुनर्विवाह की भी शुरुआत की और 1854 में विधवाओं के लिए आश्रम भी बनाया। साथ ही उन्होंने नवजात शिशुओं के लिए भी आश्रम खोला ताकि कन्या शिशु हत्या को रोका जा सके। आज देश में बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या की प्रवृत्ति को देखते हुए उस समय कन्या शिशु हत्या की समस्या पर ध्यान केंद्रित करना और उसे रोकने के प्रयास करना कितना महत्त्वपूर्ण था इस बात का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं।
विधवाओं की स्थिति को सुधारने और सती-प्रथा को रोकने व विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए भी उन्होंने बहुत प्रयास किए। सावित्रीबाई फुले ने अपने पति कसे साथ मिलकर काशीबाई नामक एक गर्भवती विधवा महिला को न केवल आत्महत्या करने से रोका अपितु उसे अपने घर पर रखकर उसकी देखभाल की और समय पर डिलीवरी करवाई। बाद में उन्होंने उसके पुत्र यशवंत को दत्तक पुत्र के रूप में गोद ले लिया और ख़ूब पढ़ाया-लिखाया जो बाद में एक प्रसिद्ध डॉक्टर बना।

कवयित्री के रूप में सावित्रीबाई फुले 

उन्होंने दो काव्य पुस्तकें लिखीं-
1.   ‘काव्य फुले
2.  बावनकशी सुबोधरत्नाकर
बच्चों को विद्यालय आने के लिए प्रेरित करने के लिए वे कहा करती थीं-
सुनहरे दिन का उदय हुआ आओ प्यारे बच्चों आज
हर्ष उल्लास से तुम्हारा स्वागत करती हूं आज

दलित उत्थान में अतुलनीय योगदान 

सावित्रीबाई फुले ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने जीवनकाल में पुणे में ही उन्होंने 18 महिला विद्यालय खोले। 1854 ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने एक अनाथ-आश्रम खोला, यह भारत में किसी व्यक्ति द्वारा खोला गया पहला अनाथ-आश्रम था। साथ ही अनचाही गर्भावस्था की वजह से होने वाली शिशु हत्या को रोकने के लिए उन्होंने बालहत्या प्रतिबंधक गृहभी स्थापित किया।
समाजोत्थान के अपने मिशन पर कार्य करते हुए ज्योतिबा ने 24 सितंबर 1873 को अपने अनुयायियों के साथ ‘सत्यशोधक समाज’ नामक संस्था का निर्माण किया। वे स्वयं इसके अध्यक्ष थे और सावित्रीबाई फुले महिला विभाग की प्रमुख। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति शूद्रों को उच्च जातियों के शोषण से मुक्त कराना था। ज्योतिबा के कार्य में सावित्रीबाई ने बराबर का योगदान दिया। ज्योतिबा फुले ने जीवन भर निम्न जाति, महिलाओं और दलितों के उद्धार के लिए कार्य किया। इस कार्य में उनकी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले ने जो योगदान दिया वह अद्वितीय है। यहाँ तक की कई बार ज्योतिबा फुले स्वयं पत्नी सावित्रीबाई फुले से मार्गदर्शन प्राप्त करते थे।
उस ज़माने में ये सब कार्य करने इतने सरल नहीं थे जितने आज लग सकते हैं। अनेक कठिनाइयों और समाज के प्रबल विरोध के बावजूद महिलाओं का जीवनस्तर सुधारने व उन्हें शिक्षित तथा रूढ़िमुक्त करने में सावित्रीबाई फुले का जो महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है उसके लिए देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले भारतीय समाजसुधारक और कवियित्री थी. अपने पति, ज्योतिराव फुले के साथ उन्होंने भारत में महिलाओ के अधिकारो को बढ़ाने में महत्वपूर्ण काम किये है. उन्होंने 1848 में पुणे में देश की पहली महिला स्कूल की स्थापना की. सावित्रीबाई फुले जातिभेद, रंगभेद और लिंगभेद के सख्त विरोध में थी.
सावित्रीबाई एक शिक्षण सुधारक और समाज सुधारक दोनों ही तरह का काम करती थी. ये सभी काम वह विशेष रूप से ब्रिटिश कालीन भारत में महिलाओ के विकास के लिये करती थी. 19 वि शताब्दी में कम उम्र में ही विवाह करना हिन्दूओ की परंपरा थी. इसीलिये उस समय बहोत सी महिलाये अल्पायु में ही विधवा बन जाती थी, और धार्मिक परम्पराओ के अनुसार महिलाओ का पुनर्विवाह नही किया जाता था. 1881 में कोल्हापुर की गज़ेटि में ऐसा देखा गया की विधवा होने के बाद उस समय महिलाओ को अपने सर के बाल काटने पड़ते थे, और बहुत  ही साधारण जीवन जीना पड़ता था.
सावित्रीबाई और ज्योतिराव ऐसी महिलाओ को उनका हक दिलवाना चाहते थे. इसे देखते हुए उन्होंने नाईयो के खिलाफ आंदोलन करना शुरू किया और विधवा महिलाओ को सर के बाल कटवाने से बचाया.
उस समय महिलाओ को सामाजिक सुरक्षा न होने की वजह से महिलाओ पर काफी अत्याचार किये जाते थे, जिसमे कही-कही तो घर के सदस्यों द्वारा ही महिलाओ पर शारीरिक शोषण किया जाता था. गर्भवती महिलाओ का कई बार गर्भपात किया जाता था, और बेटी पैदा होने के डर से बहोत सी महिलाये आत्महत्या करने लगती.
एक बार ज्योतिराव ने एक महिला को आत्महत्या करने से रोका, और उसे वादा करने लगाया बच्चे के जन्म होते ही वह उसे अपना नाम दे. सावित्रीबाई ने भी उस महिला और अपने घर रहने की आज्ञा दे दी और गर्भवती महिला की सेवा भी की. सावित्रीबाई और ज्योतिराव ने उस बच्चे को अपनाने के बाद उसे यशवंतराव नाम दिया. यशवंतराव बड़ा होकर डॉक्टर बना. महिलाओ पर हो रहे अत्याचारो को देखते हुए सावित्रीबाई और ज्योतिराव ने महिलाओ की सुरक्षा के लिये एक सेंटर की स्थापना की, और अपने सेंटर का नाम बालहत्या प्रतिबंधक गृहरखा. सावित्रीबाई महिलाओ की जी जान से सेवा करती थी और चाहती थी की सभी बच्चे उन्ही के घर में जन्म ले.

सावित्रीबाई फुले 19 वि शताब्दी की पहली भारतीय समाजसुधारक थी और भारत में महिलाओ के अधिकारो को विकसित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा.
सावित्रीबाई फुले और दत्तक पुत्र यशवंतराव ने वैश्विक स्तर 1897 में मरीजो का इलाज करने के लिये अस्पताल खोल रखा था. उनका अस्पताल पुणे के हडपसर में सासने माला में स्थित है. उनका अस्पताल खुली प्राकृतिक जगह पर स्थित है. अपने अस्पताल में सावित्रीबाई खुद हर एक मरीज का ध्यान रखती, उन्हें विविध सुविधाये प्रदान करती.
उनका पूरा जीवन समाज में वंचित तबके खासकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता. उनकी एक बहुत ही प्रसिद्ध कविता है जिसमें वह सबको पढ़ने लिखने की प्रेरणा देकर जाति तोड़ने की बात करती है :-
जाओ जाकर पढ़ो-लिखो, बनो आत्मनिर्भर,
बनो मेहनती
काम करो-ज्ञान और धन इकट्ठा करो
ज्ञान के बिना सब खो जाता है, ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते है
इसलिए, खाली ना बैठो, जाओ, जाकर शिक्षा लो
तुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौका है,
इसलिए सीखो और जाति के बंधन तोड़ दो.


मृत्यु 

28 नवम्बर 1890 को महात्मा ज्योतिबा फुले की मृत्यु के बाद उनके अनुयायियों के साथ ही सावित्रीबाई फुले ने भी सत्य शोधक समाज को दूर-दूर तक पहुँचाने, अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के अधूरे कार्यों को पूरा करने व समाज सेवा का कार्य जारी रखा। सन् 1897 में पुणे में भयंकर प्लेग फैला। प्लेग के रोगियों की सेवा करते हुए सावित्रीबाई फुले स्वयं भी प्लेग की चपेट में आ गईं और 10 मार्च सन् 1897 को उनका भी देहावसान हो गया।



जीवन के लिए दादाजी की उपयोगी सीख


मैं और मेरे दादाजी
          मेरे दादा जी श्री जगमोहन कोकास मुझे बहुत मानते थे और बचपन से ही बहुत दुलार करते थे। दादा जी की एक आदत थी कि वे रोज डायरी लिखते थे। औऱ एक डायरी के आखिरी पन्ने पर रोज कुछ बातें लिखते थे पर जब भी उनसे पूछती थीं कि इसमें आप क्या लिखते थे तो यह कहकर बात बदल देते थे अभी नहीं बेटी बाद में बतायेगे । कभी जब वो इधर उधर जाते तो मैं डायरी उठाकर पढ़ने ही वाली होती थी तो वो आ जाते तो डायरी का वो आख़री पन्ना नहीं पढ़ने देतें थे मेरे दिमाग में हमेशा बस एक बात आती थी कि आखिर इसके आख़री पन्ने पर ऐसा क्या है जो दादा जी ने लिखकर रखा है पर वो बताते नहीं है । ये बात सन 2003 की है मैं वी क्लास पास करके वी क्लास पहुंच गई और वक्त अपनी गति से आगे बढ़ने लगा ।
        मेरे दादाजी की तबीयत खराब रहने लगी थी और वो 28 अगस्त 2003 का दिन मेरे दादाजी को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया क्योंकि उन्हें गम्भीर निमोनिया हो गया था डॉक्टर ने बहुत कोशिश की मगर वक़्त के आगे कुछ नहीं हो सका और मेरे दादाजी हमें अकेला छोड़ कर इस दुनिया से चले गए । वे सिर्फ मेरे दादाजी नहीं थे वे मेरे एक अच्छे मित्र मेरे हमदर्द मेरे मार्गदर्शक और गुरु भी थे ।

      दादा जी का जाने मेरे लिए किसी सदमे से कम नहीं थामैं फूट-फूट कर रोई थीं दादा जी के साथ बिताया एक-एक पल मुझे बहुत याद आने लगा मेरे दादाजी का जीवन उनका स्वभाव मिसाल से कम नहीं था !
      एक दिन मैंने यूंही डायरी उठाई और … पन्ने पलटने लगी अचानक मेरी नजर डायरी के उस आखरी पन्ने पर पड़ी जिस पर उन्होंने खास मेरे लिए ज़िन्दगी के लिए महत्वपूर्ण सीख लिखी थी

मैंने पढना शुरू किया-

सबसे शुरू में सुंदर अक्षरों में लिखा था कोपल बेटा यह तुम्हारे लिए है तुम्हारे दादा जी की ओर से तुम्हारे जीवन में काम आने वाली कुछ अनमोल बातें ----- 
  • मेरे दादाजी की डायरी एक पन्ने पर बुकमार्क का धागा लटका हुआ था मैंने उस धागे को हटाया और पन्ना खोल दिया आख़िरी पन्ने पर लिखा था कोपल बेटे मेरे जाने के बाद तुम इन बातों को ध्यान से पढना और इसे अपने जीवन में अपनानातुम ज़िन्दगी के असल मायने समझ पाओगी और एक अच्छी सुशील संस्कारित लड़की बन जाओगी ये बाते तुम्हे तुम्हारे जीवन में कदम - कदम पर काम आयेंगी —-
  •  दादा जी ने कहा था कि जो भी काम करो सोचकर करना वक्त की कीमत को पहचानों  वक़्त पर काम करोगे तो अच्छा होगा  और कभी किसी काम में पीछे नहीं रहोगे 
  • कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है सब काम करो और कड़ी मेहनत करो फिर सफल हो या असफल ।
  • दादाजी ने कहा था कि बेटा जब लगें की किसी को आपकी जरूरत है तब बिना समय गवाएं उस व्यक्ति की मदद करो , छोटा बड़ा कोई भी हो मदद के लिए तत्पर रहो ।
  • अपने काम और मीठी बोली से सबका मन जीतो
  • दादा जी कहते थे की लोगों के बीच अपना काम ऐसा रखो की लोग आपका देखकर आपकी तारीफ करे ।
  • लोगों से अपने परिचय का दायरा बढ़ाना चाहिए ।
  • बेटा जीवन में हमेशा सच्चाई का साथ देना झूठ नहीं बोलना क्योंकि एक सच छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते है और जब सच्चाई सामने आती है तो बहुत बुरा लगता है 
  • जिंदगी में कभी कोई ऐसा काम नहीं करना जिससे तुम्हें या अपनों के सामने तुम्हे शर्मिंदा होना पड़े 
  • मुश्किलों और विपरीत परिस्थितियों में घबराना नहीं दादाजी ने लिखा था बेटा ज़िन्दगी है इसमें मुश्किलें तो आती रहेंगी कभी धूप कभी छाया यही है जीवन की माया । पर तुम जितनी भी मुशिकलें आये उनका डटकर सामना करना बिल्कुल घबराना नहीं ।
  • कोई कितना भी दुख दे नाराज़ नहीं होना चाहिए ।
  • अपने काम स्वंय करो किसी अन्य की रास्ता मत देखो की वो हमारा काम करेगा तो काम होगा । किसी को कष्ट मत दो ।
  • दादा जी ने सिखाया बड़ो का कहना मानो वो जो कहे ध्यान से सुनो
  • अपने विवेक से स्वयं निर्णय लेना सीखो लोगो की सुनो समझो और जो तुम्हें सही लगे की हाँ ये सही है वही करो
  • कम से कम ख़र्च में गुजारा करना सीखो जरूरी नही है की हर एक चीज तुम्हारे पास हो जितना है उतने में संतोष रखो
  • ज़माना कितना भी टेढ़ा हो तुम टेढ़े जमाने में भी सीधे बनकर रहना
  • अपने से छोटो के लिए प्यार औऱ वात्सल्य का व्यवहार रखना ।
  • अपने व्यवहार में प्रगतिशीलता रखना हमेशा । 
  • सुविधाओं और भौतिक सुखों के पीछे न भागना 
  • रिश्तेदारों और मित्रों  , पड़ोसियों से अच्छे सम्बन्ध बनाए रखना 
  • अपने स्वार्थ को त्याग कर परमार्थ के लिए जीना सीखो ।
  • जितना है उतने मैं सन्तोष करो क्योंकि इस दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जिनके पास तुम्हारे पास जितनी चीज़ें हैं उतना भी नहीं है ।
  • हमेशा समय के लिए पाबन्द रहो सभी काम ठीक समय पर करो किसी चीज के लिए इंतजार मत करो । 
  • बुराई का नहीं अच्छाई के रास्ते पर चलो जो चीजें बुरी होती है बेटा वही अच्छी लगती है पर तुम बुराई का नहीं अच्छाई के मार्ग पर चलना
  • जो होता है अच्छे के लिए होता है जिंदगी तुम्हें कई जगह ले जाएगी पर तुम्हें सोच समझकर अपना रास्ता चुनना है उस पर चलना है कई खट्टे मीठे अनुभव होंगे ये सब तुम्हें आगे बढ़ाने और इम्प्रूव करने का काम करेंगे । इसलिए निराश होकर नहीं खुश होकर रहो
  • अपने से छोटा किसी को मत समझो कोई अमीर है या गरीबी उसका मजाक मत उड़ाओ । वो जैसा भी है वो एक इंसान है वो गरीब है फटे कपड़े पहनता है उसका मजाक मत उड़ाना । 
  • कोई अगर आपको कुछ बता रहा है समझा रहा है तो समझों और आपको कुछ पता है तो लोगों से बाटों क्योंकि हर व्यक्ति के पास ज्ञान का भंडार है । जहाँ लगें बोलना है वहां वक़्ता बनकर बोलो जहां कोई बोल रहा है श्रोता बनकर सुनो । जहां कुछ गलत होता दिखे तो चुप ना रहो गलत के लिए आवाज उठाओ । 
  •  अगर तुमसे कोई गलती हो गई है वो तुमसे नाराज है तो अपनी गलती स्वीकारो और माफी मांगो नारजगी और गुस्से को लम्बा मत खीचना । 
  • छायादार वृक्ष बनो जीवन में हमेशा फल फूल छाया देने वाला पेड़ बनो अपने अपनो के लिए सोचों उन्हें साथ लेकर चलो छाया मतलब उनका साथ दो फल मतलब अपना काम और व्यवहार ऐसा रखो की लोगों खुशी के फल दे । 
  • हमेशा यकीन रखो कि सुरंग के अंत में प्रकाश होगा। परिस्थितियों को control करने के लिए जो कर सकते हो करोलेकिन अंत में जो भी नतीजा आये उसे स्वीकार करोक्योंकि वे तुम्हारे हाथ में नहीं होतेजो भी हुआ है उसे ऐसे ही होना था! 
  • बहुत बार तुम्हे लगता है कि ज़िन्दगी बहुत कठिन है लेकिन ये सरल हो सकती है सोचोगे के ये काम कठिन है तो वो तुम्हें सरल नहीं लग सकता है तुम्हे एक साथ बहुत सारी चीजें नहीं करनी हैंतुम ज़िन्दगी में जो कुछ भी डालोगे वो तुम्हे इंटरेस्ट के साथ उसे लौटा देगी। खुशियों चीजों में नहीं होतीं वो तुम्हारे भीतर होती हैं। छोटी छोटी चीजों से खुशियां ढूढों ।
  • औरों के लिए खुद को बदलो नहीं सिर्फ इसलिए अपने आप को मत बदलो क्योंकि तुम जैसे हो उस रूप में लोग तुम्हे अपनाते नहीं। तुम ख़ास  हो अपनी अपनी विशिष्टता को खोना मत। हेमशा वही बोलो जो तुम सचमुच दिमाग से सोचते होभले इससे हर कोई वास्ता ना रखता हो। जब तुम खुद से सच्चे रहते हो तब तुम इस दुनिया को सुन्दर बनाते हो- वो सुन्दरता जो पहले नहीं थी 
  • हम रोज कुछ नया सीखते हैं जो हमें किसी न किसी रूप मे बदल देता है… और हमें एक दिन एहसास होता है कि हम वाकई में बदल गए हैं। ये बिलकुल natural है इसलिए कभी इसके लिए अफ़सोस मत करना। बदलाव प्रकृति का नियम है।
  • खुशियाँ चुनोपैसे नहीं हर एक निर्णय में पहले खुशियों को देखो बाद में बैंक बैलेंस।  इस तरहजब तुम बूढ़े होगे तो तुम चीजों की असल कीमत जानोगे उनकी मॉनिटरी वैल्यू नहीं। तब तुम समझोगे कि ज़िन्दगी की सबसे कीमती चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें पैसा नहीं खरीद सकता। पैसा है तो सबकुछ पर अगर इंसान जीवित है तो कमाकर पैसा भी आ जाएगा इसलिए इंसान और खुशियों को महत्व दो
  • तुम  खुश नहीं होतो ये परिस्थितयों की वजह से नहीं हैबल्कि तुम्हारे खुश ना रहने के निर्णय की वजह से है। 
  • जब ज़िन्दगी के रास्तो में मुश्किल आये तो बड़ी सी मुस्कान दोउस मौजूदगी स्वीकार करो और हँसते हुए उसे पार करो। खुश रहने का निर्णय लो और चाहे जो हो जाए अपने निर्णय पर अडिग रहो.. यही खुश रहने का रहस्य है।
  • जिन लोगों से तुम प्यार करते होउनपर पूरा ध्यान दो
  • ज़िन्दगी में टकराने वाले सभी लोग अच्छे नहीं होते। कुछ मामलों में वे हमारी सफलता को व्यर्थ करते हैं। जब लगे कि वह व्यक्ति तुम्हारे लिए सही नहीं है तो मजबूरी में उससे चिपके मत रहो एक निर्णय  लो और आगे बढ़ जाओ।
  • अंत सुखद अंत नहीं होता ! रूकावटे लाइफ का हिस्सा हैं….ज़रूरी नहीं कि तुमने जो कुछ भी शुरू किया उसका एक सुखद अंत हो। इसलिए जब बहुत प्रयास करने पर भी सुखद अंत ना हो तो बेहतर होगा कि तुम एक नई शुरुआत करो। कभी भी पुराना सबकुछ छोड़ कर नया शुरू करने से डरो मतचाहे तुम उम्र के किसी भी पड़ाव पर हो। 
  • बेटा जीवन में हमेशा खुश रहो और एक फल फूल और छाया देने वाला वृक्ष बनाना खूब नाम कमाना हमारा अपनो का नाम रोशन करना जो भी करना पूरे मन से करना सबको साथ लेकर चलना  


तुम्हारे,

दादाजी

मित्रों सोचा ही नहीं था दादाजी का साथ छूट जाएगा दादाजी की बताई हुई ये बातें मैं हमेशा याद रखती हूँ