मेरी पसंदीदा फ़िल्म द बर्निग ट्रेन

                   
                   मित्रों सन १९८० में बनी The burning train मूवी मेरी अब तक की सबसे ज्यादा पसंद की फ़िल्म है जिसे मैं अपने बचपन 199 से देखती आ रही हूँ यह मूवी मैंने अपने बचपन के कुछ 8 - 9 साल तक नहीं देखी थी लेकिन उसके बाद कब से देखना शुरू किया ठीक - ठीक तो संन और क्रम याद नहीं है कितने बार देखी है परन्तु अवश्य है ये की मैंने यह पिक्चर 30 बार अब तक देख ली है ।
                उन दिनों हम केलाबाड़ी में रहते थे और हमारे घर पर सोनी की कम्पनी का कलर टीवी था हमेशा ऐसा होता था यह मूवी टीवी पर आती थी सेट मैक्स चैनल पर यह मूवी सबसे ज्यादा दिखाई जाती थी तो कभी मेरे स्कूल से आने के समय शाम 5 बजे दिखाई जाती थी तो कभी रात 9 बजे मैं इस मूवी को देखती ही थी कभी ऐसा भी हुआ है की मैं अपने दादा जी के घर जाती थी वहां टीवी पर आती थी तो मूवी अगर देर रात में भी खत्म होती थी तो भी मैं देर रात जागकर देखती थी भले ही सुबह देर से सोकर उठूं ।
                  मेरी एक बुआ जो हुडको भिलाई में रहती थी उनके घर हम अक्सर जाते थे तो एक बार हम मिलने गये और यह मूवी वहां टीवी पर आ रही थी और रात के बारह बज रहे थे घर वापस आने में देर भी हो रही थी मैं तो बैठ गई पिक्चर देखने के लिए मेरी मम्मी बार -बार मुझे बोल रही थी चल कोपू बेटा घर पर आयेगी तब देख लेना सब वहां मम्मी से कहने लगे अरे देखने दो बच्ची को तो मम्मी मान गई और मुझे देखने मिला जब तक पिक्चर पूरी खत्म नहीं हो गई तब तक मैं बैठी ही रही ।
                  उसके बाद भी कई ऐसे अवसर मिले की मैंने The burning train मूवी देखी बहुत बार देखी तो सबसे मुझसे पूछते थे की तुम्हें यही पिक्चर देखने में क्या मजा आता है तब तो मैं छोटी थी कोई जवाब नही थी क्योंकि उतनी समझ नही थी आज जब समझदार हो गई हूँ चीजों को जानने समझने लगी हूँ तो बता सकती हूँ की मुझे यह पिक्चर क्यों इतनी पसंद है । ज़ाहिर सी बात इतने दफा देख ली है तो सारे दृश्य याद हो गये है डायलोग गाने सब याद हो गये है फिर भी जितनी बार भी मैं देखती हूँ तो उतने बार एक नया रस , नया लुत्फ़ मिलता है , बारीकियां पता चलती है , हर बार देखने पर एक नया मैसेज मिलता है  ।
               फ़िल्म द बर्निंग ट्रेन (The burning train) जिसे बी.आर चोपड़ा साहब ने produce किया और रवि चोपड़ा जी ने निर्देशित किया था कहानी थी रवि चोपड़ा की , डायलोग कमलेश्वर ने लिखे थे और सभी गानो के बोल( लिरिक्स ) साहीर लुध्यानिवी ने लिखे थे , संगीत आर.दी बर्मन साहब ने दिया था Cinematography धरम चोपड़ा ने की थी यह मूवी कुल १८२ मिनिट की बनी थी और यह मूवी 28 मार्च १९८० को रिलीज हुई थी ।

                 भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार्स धर्मेन्द्र ने अशोक का किरदार निभाया था हेमा मालिनी ने सीमा ,विनोद खन्ना विनोद का ,परवीन बॉबी ने शीतल ,नीतू ने मधु ,जीतेंद्र ने रवि डैनी देंज़ोग्प्पा ने रणधीर इनके अलावा इसमें और भी सितारों ने अहम भूमिका निभाई मैं समझती हूँ इन सब किरदारों के अभिनय के वजह ही यह मूवी हिट हुई थी विनोद मेहरा ने राकेश , इफ्तेक्खर ने रेलवे बोर्ड चेयरमैन , रंजीत ने चनदर,सिमी ग्रेवाल ने स्कूल टीचर , नज़ीर हुसैन ने विनोद खन्ना के पिता की भूमिका निभाई थी , सुजीत कुमार ने इस्पेक्टर रणवीर की , ओम शिवपुरी ने राजा राम मोहन , मदन पूरी ने सेठ धरमदास, इन्द्रानी मुखर्जी ने पद्मिनी की , असरानी जी ने मेजर पिके भंडारी , केश्तो मुखर्जी ,पेंटल ने बिना टिकिट यात्री की , नवीन निश्चोल ने डॉक्टर की आशा सहदेव ने रामकली की राजेन्द्र नाथ ने पंडित जी ,युनुस परवेज ने मौलाना की , दिनेश ठाकुर ने ट्रेन के गार्ड की ,जानकीदास ने ट्रेन के कंडक्टर की ।
इस फ़िल्म में धर्मेन्द हेमा मालिनी का प्रेम उनकी केमिस्ट्री जो बहुत अच्छी थी

यह मूवी बेस्ड थी एक ट्रेन जिसे सुपर एक्सप्रेस का नाम दिया गया जो दिल्ली से मुम्बई की यात्रा के लिए बनाई थी जिसके उद्घाटन पर उस ट्रेन में आग लग जाती है । औऱ फिर विनोद औऱ अशोक मिलकर ट्रेन को बचाते हैं ।

मेरी पसंद के कुछ सीन्स जिनकी वजह से ही मुझे यह मूवी बार - बार देखना पसंद है -


  • द बर्निंग ट्रेन फ़िल्म में मित्रों अशोक ,विनोद सच्चे मित्रों की आपसी मित्रता बहुत अच्छी लगती है यह बात की का संदेश देता है की किस ईमानदारी ,विशवास और सह्दयता के साथ मित्रता निभाई जाती है फ़िल्म के अंत तक विनोद खन्ना और धर्मेन्द ने की अपनी मित्रता बखूबी निभाई है उनकी दोस्ती इंजिन और रेलगाड़ी के डिब्बे जैसी है । रेलवे के कर्मचारी जिस लगन से काम करते है वह मुझे बहुत पसंद आता है ।
  • इस फ़िल्म का दूसरा जो मुझे पसंद है वो है जिसमें रेलवे कमेटी विनोद को सुपर एक्सप्रेस बनाने के लिए उनका डिजाइन पास कर देती है और सुपर एक्सप्रेस का इंचार्ज भी विनोद को बनाया जाता है ।
  • एक सीन जिसमें अशोक (धर्मेन्द्र ) के पिता कर्जे में डूब जाते है और वह कर्जा चुकाने में असफल होने की वजह से अपने आपको गोली मार लेते है और उनका सब कुछ छीन जाता है विनोद अशोक का मुश्किल में वक्त साथ निभाते है ।
  • विनोद अपनी ट्रेन को बनाने के लिए बहुत ईमानदारी ,लगन ,साहस के साथ काम करते है जिसके चलते वे वे अपनी पत्नी शीतल को समय नहीं दे पाते है और किस तरह घर और काम के बीच सामंजस्य स्थापित करते है वह काबिले तारीफ़ है । 
  • जब विनोद खन्ना और शीतल (परवीन बॉबी का झगड़ा होता है और वह घर छोड़कर चली जाती है और विनोद यह कहता है की वो जाती है तो जाएं तो विनोद के पिता उसे समझाते है की उसके दुःख को समझो विनोद पत्नी को अंहकार से नहीं प्यार से जीता जाता है तुम जिन्दगी को रेल की रफ्तार से तौल रहे है उस रफ्तार का फायदा जो घर से दूर ले जाए ।
  • सुपर एक्सप्रेस के यात्रियों का ख़ासतौर पर पीके भंडारी ( असरानी साहब ) का मनोरंजन फ़िल्म को और ज्यादा दिलचस्प बनाते है ।
  • फ़िल्म के किरदार रवि और मधु , अशोक और सीमा ,विनोद और शीतल इनके बीच का आपसी प्रेम ८० के दशक के प्रेम को दर्शाता है की किस तरह का प्रेम , बंदिशे , समझ प्रेमियों में होना चाहिए उस वक्त के प्रेम में एक अनूठापन हुआ करता था ।
  • द बर्निंग ट्रेन फ़िल्म में एक्शन के साथ - साथ थ्रिल ,रोमांस और कोमेडी है जो इस फ़िल्म को बहुत रोचक बनाते है ।
  • जब रंजीत डैनी ट्रेन के गार्ड उस्मान अली से कहता है की यह ट्रेन अब रेलवे का इतिहास लिखेगी की सारा हिन्दुस्तान कभी नहीं भूल पायेगा और जब ट्रेन मथुरा पहुंच जाती है तब डैनी सुपर एक्सप्रेस के इंजिन से वैक्यूम ब्रेक निकाल देता है और ट्रेन का ड्राईवर डेंगो कहता है यह रेलवे का हुलिया बदल देगा तो रंजीत डैनी कहता है हाँ हुलिया तो बदल ही देगा । और ट्रेन के इंजिन के टूल बॉक्स में एक छोटा सा बम रख देता है ।
  • वह सीन भी अच्छा लगता है जब रंजीत डैनी अशोक को बताता है की उसने आज अपना बदला विनोद से ले लिया अपना भी तुम्हारा भी अशोक कहता है किस बात का बदला रंजीत डैनी कहता है की विनोद ने मेरी मोहबत छीन ली मैंने कुछ नहीं कहा , उसने मेरी सुपर एक्सप्रेस छीन ली फिर मैंने कुछ नहीं कहा लेकिन आज सब हिसाब चुकता हो जाएगा अशोक कैसा हिसाब तो रंजीत कहता है कुछ नहीं दोस्त अब यह ट्रेन कभी नहीं रुकेगी तो अशोक कहता है की क्यों नहीं रुकेगी कुछ नहीं दोस्त मैंने इंजिन में से वैक्यूम ब्रेक निकाल दिये है और उसमें एक छोटा सा टाइम बम भी रखा हुआ है अशोक कहता है मेरे यार की ट्रेन को कुछ हुआ तो तेरा जो हश्र जो होगा वो भगवान ही जानता रंजीत कहता है अब बहुत देर हो गई है दोस्त ठीक 5 बजे जैसी ही ट्रेन स्टेशन छोड़ेगी बम फट जाएगा उसके बाद रंजीत और अशोक की लड़ाई और मारपीट होती है ।
  • वह सीन जिसमें अशोक विनोद की ट्रेन को बचाने के लिए वहां से कार लेकर भागता है बीच रास्ते में जब कार खराब हो जाती है तो वह बीच रास्ते में रखी एक युवक की बाइक से स्टेशन तक पहुँचने की कोशिश करता है ऊँचाल मारकर वह बाइक से सीधा ट्रेन तक पहुँच जाता है और चलती ट्रेन में गार्ड से कहता है की वह फौरन गाड़ी रुकवाए किसी पागल ने इंजिन में बम रख दिया है किसी तरह ड्राईवर को इन्फॉर्म कीजिए और गाड़ी रुकवाइये जैसे ही गार्ड ड्राईवर को फोन करके कहता है जीवनलाल फौरन इमेरजैंसी ब्रेक लगाओ ड्राइवर के इमेरजैंसी ब्रेक लगाने से पहले बम फट जाता है और फोन पर ड्राईवर नि:शब्द हो जाता है अशोक कहता है लगता है मैंने आने में देर कर दी ।
  • जब ट्रेन नाबदा स्टेशन पर सुपर एक्सप्रेस का ड्राइवर स्टेशन पर proceed signal नहीं देता है तब रतलाम स्टेशन पर फोन संदेश पहुंचाया जाता है पुलिस स्टेशन के यात्रियों को पीछे करके उन्हें सम्भालती है इस सीन में मुझे पुलिस और रेलवे कर्मी बहुत डेडिकेशन से ड्यूटी निभाते है वह अच्छा लगता है । 
  • वह सीन जिसमें रेलवे के लोगों को दो बुरी खबरें मिलती है ड्राईवर ने सिग्नल नहीं दिया और ड्राईवर डेंगो ट्रैक पर मिला और मरते हुए कहता है ट्रेन में एक बम फटा जिसके धमाके की वजह से वह बाहर गिर पड़ा ।
  • वह सीन भी मुझे पसंद है जिसमें विनोद कहता है की हमारे सामने अब बातें ज़ाहिर है हो चुकी है १ इंजिन में explosion हुआ 2 ट्रेन में ड्राइवर्स नही है 3 ट्रेन में बम फटा जिसकी वजह से अब वैक्यूम ब्रेक्स भी फेल हो चुके है अब ट्रेन को रोकने का एक ही रास्ता है विनोद के सर कहते है वो क्या विनोद कहता है सर कोई ट्रेन के इंजिन में जाकर इमेरजैंसी ब्रेक लगा दे तो ट्रेन रुक जायेगी सर कहते है इंजिन में जाएगा कौन गाड़ी १०० मील की रफ्तार से चल रही है पर यह मैसेज उन तक पहुँचाओ कैसे विनोद कहता है की सर all india radio अक्सर ट्रेन में मुसाफिरों के पास ट्रांजिस्टर होते है अगर एक भी ट्रांजिस्टर ओन रहेगा तो उन तक हमारा मिस्ज उन तक पहुंच जाएगा तो एक तो साहस करेगा मैं जानता हूँ सर ये अँधेरे में तीर चलाने वाली बात है पर और कोई रास्ता नहीं है ।
  • जब रेलवे के लोग यात्रियों के पास अपना मैसेज पहुंचाते है की अगर आप हमारी आवाज सुन रहे है तो किसी भी आने वाले स्टेशन पर लाल कपड़ा फेंक दीजिए जिससे हमें यह पता चल जाएं की आप तक हमारी आवाज पहुंच रही है फिर रवि ( जीतेंद्र ) यात्रियों से कहता है की अगर किसी के पास लाल कपड़ा हो तो दे दीजिए बहुतो की जिन्दगी खतरे में है फिर एक यात्री जो मुझे पसंद है रामकली वो सबकी रक्षा के लिए अपनी साड़ी देती है ।
  • एक सीन जिसमें रेल्वे के कर्मचारी यह सुनकर की ट्रेन रुक नहीं रही है किचन की गैस और सिलेंडर खुला छोड़कर बाहर निकल जाते है ट्रेन में एक महिला गर्भवती रहती है और उसे दर्द शुरू हो जाता है ट्रेन में एक डॉक्टर रहता है उन्हें बुलाया जाता है डॉक्टर कहता है मेरा बैग और गर्म पानी ले आइये जैसे ही कर्मचारी पानी लेने के लिए लाइटर ओन करता है  ब्लास्ट हो जाता है और वह बुरी तरह झुलस जाता है ट्रेन की छत पर सवार रवि और अशोक वापस आ जाते है और गार्ड ट्रेन की छत से ही नीचे गिरकर मर जाता है । और इस तरह पूरी ट्रेन में आग बढ़ती जाती है और यात्री इधर - उधर होकर अपनी जान बचाते है । 
  • जब ट्रेन का इंजीनियर विनोद रेलवे यात्रियों के पास रेडियो से अपना मैसेज पहुंचाता है की इस मुश्किल को आप लोग ही हल कर सकते है क्योंकि आप ट्रेन में है और विनोद कहता है की आप में से  2-3 नौजवान हिम्मत करके अगर ट्रेन की छत से होते हुए इंजिन तक पहुंच जाए और ड्राईवर पैनल पर जे ऊपर छोटा लीवर और बड़ा लीवर को आहिस्ता - आहिस्ता बाई तरफ गुम दे तो गाड़ी रुक जायेगी all the best और फिर अशोक , रवि और गार्ड ट्रेन की छत पर जाते है । 
  • वो सीन भी अच्छा लगता है राकेश जो ट्रेन को बचाने के लिए एक मील लम्बा incline बनाने की मांग करता है जिसके दोनों तरफ रेत का ढेर हो और जब ट्रेन इस incline पर जायेगी तो मुमकिन है नुक्सान कम होगा और इस तरह उसे incline बनाने की इजाजत मिल जाती है और incline बनाने की प्रकिया पूरी तेजी से शुरू हो जाती है । 
  • विनोद अपने रेलवे के हेड से कहता है की एक idea है एक इंजिन अगर सुपर एक्सप्रेस के साथ दौड़ा सकते है अगर कोई fireproof suit पहनकर सुपर एक्सप्रेस में पहुंच जाए तो  इमेरजैंसी ब्रेक लगा दे तो ट्रेन रुक सकती है ।
  • फिर विनोद दुसरे इंजिन से सुपर एक्सप्रेस के बगल वाले ट्रैक पर आता है रवि और अशोक के साथ fireproof suit पहनकर छत से होते हुए इंजिन तक जाते है तब उन्हें पता चलता है की इस ट्रेन के सारे कण्ट्रोल फेल हो चुके है अशोक कहता है क्या ये ट्रेन अब नहीं रुकेगी विनोद कहता है नही इस ट्रेन के सब कण्ट्रोल बुरी तरह फेल हो चुके है अशोक कहता है की तुम्हारे पास dynamite है न क्यों नना ट्रेन और इंजिन के बीच कोम्प्लिंग को उड़ा दे विनोद कहता है अगर स्पीड में कोम्प्लिंग उड़ाया जाए तो ट्रेन पटरी से उतर जायेगी सब के सब मर जायेगे रवि कहता है मरना तो वैसे भी है विनोद रवि से कहता है की एक तरीका है जब हम ट्रेन को incline पर लेगे तब हम क्म्प्लिंग को उड़ा सकते है रवि तुम जाकर यात्रिओं से खो की अपने आपको किसी चीज से बाँध ले ताकि जब धमाका हो तो किसी को नुकसान ना पहुंचे रवि  जाकर सबसे कहता है भाइयों और बहनों अशोक और विनोद ट्रेन को रोकने के लिए कोल्प्लिंग को रोकने के ले ब्लास्ट करने वाले है इसलिए आप लोग अपने को किसी चीज़ से बाँध ले ताकि सब ट्रेन रुके तो किसी को चोट ना पहुंचे ।
  • एक सीन जिसमें स्कूल टीचर (सीमी गरेवाल ) सरदार जी बच्चों को बाँधने के लिए पगड़ी मांगती है तो सरदारनी मना करते हुए कहती है सरदार जी नु पगड़ी मांगदी है तो सरदार अपनी पगड़ी देते हुए कहते है हमारे गुरुओं ने लोगो की मदद के लिए सर कटवा दिए और मैं पगड़ी नहीं दे सकता । धर्म से बडी सहायता होती है एक मौलाना पंडित जी से कहते है आज जब मौत सामने खड़ी है तब पता चला मौत का कोई धर्म नहीं होता है वह कभी भी किसी को भी आ सकती है ।
  • अंत में विनोद और अशोक कोम्प्लिंग को उड़ाने के लिए इंजिन और ट्रेन के बीच के हिस्से में dynamite लगा देते है और वहां दूसरी तरफ विनोद राकेश से पूछता है की हमें incline कितना तैयार हो चुका है हमे incline पर डाल दो राकेश कहता है की पूरी fishplate अभी तक नहीं लगी है ट्रेन divaile भी हो सकती है विनोद कहता है ये बहस करने का वक्त नहीं है ट्रेन के सब कण्ट्रोल फेल हो चुके है जो मैं कहता हूँ करो हमें incline पर डाल दो विनोद और अशोक कोम्प्लिंग को ब्लास्ट कर देते है और मुसाफिरों की जान बचा लेते है ।

           
                   यह फ़िल्म दर्शाती है दुश्मनी , मित्रता , प्रेम ,एक दुसरे के प्रति अपनापन , रेलवे किस तरह अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी, साहस के साथ निभाते है ।

Fabulous songs by R.D. Burman i loved them all, from the funky title music to the the fun 'Pehli nazar mein hamne' where we see our lovers cycling simultaneously, 




                                        और मेरी पसंद का रोमांटिक गीत वादा हाँ वादा 



though are the lovely prayer song 'Teri hai zameen, tera aasman' its the scene that made me cry as a little boy, this film still holds the record for the only movie i've ever sobbed to





an awesome qawwali and one of my all time favourite filmi qawwalis 'pal do pal ka'



and the absolutely fabulous 'Meri Nazar hai tujpe' a east meets west blend of music and dance off between Hema Malini and Parveen Babi

Paisa Vasool Rating: 10/10 (One of my all time favourites)




5 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (04-02-2018) को "अपने सढ़सठ साल" (चर्चा अंक-2869) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar ने कहा…

यह मेरी भी पसंदीदा फिल्म है.

कोपल कोकास ने कहा…

जी अच्छा पर जितनी मेरी है उतनी किसी की नहीं होगी
मैंने 30 बार देखी है ।
धन्यवाद

madhu saxena ने कहा…

फ़िल्म के सभी मसाले होने के बाद कहानी प्रभावित करती है ।दर्शकों की सांसे भी कहानी के उत्तर चढ़ाव के अनुसार चलती है ।आग से दहशत होने लगती है ।हर सीन असली लगता है । अंत मे राहत की सांस लेता दर्शक फ़िल्म की तारीफ किये बिना नही रहता ।बहुत बढ़िया लिखा ।

कोपल कोकास ने कहा…

धन्यवाद मधु जी

एक टिप्पणी भेजें