वीर शिवाजी की जयंती

       
 शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। शिवाजी कई कलाओं में माहिर थे, उन्होंने बचपन में राजनीति एवं युद्ध की शिक्षा ली थी। छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) भारत के महान योद्धा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी वे बहुत बहादुर,बुध्दिमानी ,शौर्य ,दयालु शासक थे शिवाजी महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे उन्होंने भारत देश के निर्माण के लिए बहुत से कार्य किये वे एक महान देशभक्त भी थे , जो भारत माता के लिए अपना जीवन अर्पण करने को तैयार थे आज उनकी जयंती है ।


1."स्वतंत्रता एक वरदान है, जिसे पाने का अधिकारी हर कोई है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

2."एक छोटा कदम छोटे लक्ष्य पर, बाद मे विशाल लक्ष्य भी हासिल करा देता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

3."जरुरी नही कि विपत्ति का सामना, दुश्मन के सम्मुख से ही करने मे, वीरता हो। वीरता तो विजय मे है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

4."जब हौसले बुलन्द हो, तो पहाङ भी एक मिट्टी का ढेर लगता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज


5."शत्रु को कमजोर न समझो, तो अत्यधिक बलिष्ठ समझ कर डरना भी नही चाहिए।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

6. "जब लक्ष्य जीत की हो, तो हासिल करने के लिए कितना भी परिश्रम, कोई भी मूल्य , क्यो न हो उसे चुकाना ही पङता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज


7."सर्वप्रथम राष्ट्र, फिर गुरु, फिर माता-पिता, फिर परमेश्वर।अतः पहले खुद को नही राष्ट्र को देखना चाहिए।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

8."अगर मनुष्य के पास आत्मबल है, तो वो समस्त संसार पर अपने हौसले से विजय पताका लहरा सकता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

9."इस जीवन मे सिर्फ अच्छे दिन की आशा नही रखनी चाहिए, क्योकी दिन और रात की तरह अच्छे दिनो को भी बदलना पङता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

10."अंगूर को जब तक न पेरो वो मीठी मदिरा नही बनती, वैसे ही मनुष्य जब तक कष्ट मे पिसता नही, तब तक उसके अन्दर की सर्वौत्तम प्रतिभा बाहर नही आती।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

11."जो मनुष्य समय के कुच्रक मे भी पूरी शिद्दत सेअपने कार्यो मे लगा रहता है। उसके लिए समय खुद बदल जाता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

12."प्रतिशोध मनुष्य को जलाती रहती है, संयम ही प्रतिशोध को काबू करने का उपाय होता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

13."कोई भी कार्य करने से पहले उसका परिणाम सोच लेना हितकर होता है; क्योकी हमारी आने वाली पीढी उसी का अनुसरण करती है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

14."अपने आत्मबल को जगाने वाला, खुद को पहचानने वाला, और मानव जाति के कल्याण की सोच रखने वाला, पूरे विश्व पर राज्य कर सकता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

15."शत्रु चाहे कितना ही बलवान क्यो न हो, उसे अपने इरादों और उत्साह मात्र से भी परास्त किया जा सकता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

16."उत्साह मनुष्य की ताकत, संयम और अडिकता होती है। सब का कल्याण मनुष्य का लक्ष्य होना चाहिए। तो कीर्ति उसका फल होगा।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

17."एक सफल मनुष्य अपने कर्तव्य की पराकाष्ठा के लिए, समुचित मानव जाति की  चुनौती स्वीकार कर लेता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

18."आत्मबल, सामर्थ्य देता है, और सामर्थ्य, विद्या प्रदान करती है। विद्या, स्थिरता प्रदान करती है, और स्थिरता, विजय की तरफ ले जाती है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

19."एक पुरुषार्थी भी, एक तेजस्वी विद्वान के सामने झुकता है। क्योकी पुरुर्षाथ भी विद्या से ही आती है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

20."जो धर्म, सत्य, क्षेष्ठता और परमेश्वर के सामने झुकता है। उसका आदर समस्त संसार करता है।" ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

21 .''कभी अपना सर मत झुकाओ, हमेशा उसे ऊँचा रखो.'' ~ छत्रपति शिवाजी महाराज


22 .''भले हर किसी के हाथ में तलवार हो, यह इच्छाशक्ति है जो एक सत्ता स्थापित करती है.'' ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

 23 .'' जो मनुष्य समय के कुच्रक मे भी पूरी शिद्दत से, अपने कार्यो मे लगा रहता है। उसके लिए समय खुद बदल जाता है।''  ~ छत्रपति शिवाजी महाराज

24 .'' जरूरी नहीं कि मुश्किलों का सामना दुश्मन के सामने  ही करने में वीरता हो, वीरता तो विजय में है। '' ~ छत्रपति शिवाजी महाराज


25 .'' बदला लेने की भावना मनुष्य को जलाती रहती है, संयम ही प्रतिशोध को काबू करने का एक मात्र उपाय है।''  ~ छत्रपति शिवाजी महाराज



1 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपको सूचित किया जा रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बुधवार (21-02-2018) को
"सुधरा है परिवेश" (चर्चा अंक-2886)
पर भी होगी!
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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