होली रंगो का त्यौहार

           


       होली ना सिर्फ रंगो का बल्कि अपनों के संग खुशियाँ मनाने का,प्यार बढ़ाने का , नई शुरुआत करने का त्यौहार है इस दिन पुराने गिले शिकवे भूलकर अपनों से फिर मिलकर एक दूसरे के रंग में रंग जाने का दिन है होली । होली के त्यौहार पर रिश्तेदार , पड़ोसी, मित्रवर्ग, हर्ष और उल्लास से एक दूसरे से मिलते हैं । एक दूजे को रंग लगाते हैं । नृत्य गान करते हैं । ढोलक मंजीरा और अन्य संगीत वादक बजाकर मनोरंजन करते हैं । 


       मेरा मेरा मानना है कि ये रंग तो पानी से छुड़ाने पर छूट जायेंगे अपने प्यार के अपनेपन रंग , विश्वास के रंग ,इस तरह अपने अपनों की जिन्दगी में इस तरह भरे की वो हमेशा आपके अपने बने रहे , ऐसा ही होता है होली के दिन रंगो से लोगों के साथ खूब खेलते है और कुछ समय बाद रंग भूलकर लड़ाई - झगड़ो के मैदान में उतर जाते है क्या फायदा ऐसे रंगो का ऐसे त्योहारों का 


      त्यौहार मनाइए पर इस तरह मनाइए कि साल भर आप याद करते रहे भले ही आप होली पर रंग खेले या नहीं पर रिश्तों में मिठास बरकरार रखिए कहने का मतलब यह है कि आजकल तो लोग एक दुसरे के घर भी बहुत कम जाते है तो त्यौहार पर भी सपरिवार जाएं और हफ्ते , महीनों में एक या दो बार भी जरुर जाएं चाहे वो आपके पड़ोसी हो या रिश्तेदार परिचित मित्र कोई भी हो उनके घर जाएं मीठा लेकर जाएं   


      पहले का वो समय अब कहाँ नहीं तो पहले होली के दिन पर अपनों के घर पर चहलपहल होती थी दिनभर होली खेलने के बाद रात को सब थकने के बाद एक साथ खाना खाते थे ढेर सारी बातें हुआ करती थी शायद टेक्नोलॉजी ने हमसें वो पल वो दिन भी छीन लिए आज तो लगो होली खेलने के बाद व्हात्स्प या फेसबुक या मोबाइल में लोगों के मैसेज भेजने का काम करते है ऐसा लगता है कभी - कभी तो कि हम त्यौहार सिर्फ मोबाइल के माध्यम से ही मनाते है उपयोग करें मगर त्यौहार वाला दिन सिर्फ अपनों के नाम करें


      मुझे सबसे अच्छी चीज होली की रात लगती है जब चारों और लोग नहीं दिखाई देते लोग अपने घरों में रहते है सड़के सूनी हो जाती है इक्की - दुक्की दुकानें खुली रहती है तब उन दुकानों में जाकर कुल्फी खाने का और रात को सड़को पर घूमना मेरा सबसे पसंदीदा काम है जो होली की रात बहुत पसंद है


होली की रंगबिरंगी शुभकामनाएं खेले मगर प्यार से बिना किसी को नुकसान पहुँचाएं 

3 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (02-03-2017) को "जला देना इस बार..." (चर्चा अंक-2897) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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रंगों के पर्व होलीकोत्सव की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

कोपल कोकास ने कहा…

धन्यवाद ओंकार जी

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