आपके पास है क्या माँ और दादी माँ की पहनी हुई साड़ी

       
              हम अपने बचपन से जवानी तक कितने सारे कपड़े खरीदते है कुछ हमें मिलते है ,  या हम स्वयं खरीदते है कपड़े पहनते है , फटते है तो हम रद्दी में निकाल देते है कुछ कपड़े सालों साल चलते है जिनमें कुछ यादे होती है किसी व्यक्ति की जिन्हें हम सहेजकर रखते है कि ये ड्रेस कभी हम रद्दी में नहीं निकालेगे हाँ मैं तो यही सोचती हूँ कि कुछ कपड़े जो आपके स्वयं के हो , आपको किसी खास व्यक्ति ने दिए हो , या फिर आपके किसी ख़ास व्यक्ति के हो उन्हें सम्भालकर जरुर रखना चाहिए कुछ लोगों का कहना होता है इस बार पर कि अरे इतने पुराने हो गया है ये ड्रेस अब इसे कौन पहनेगा या इसे रखकर क्या फायदा है तो मुझे लगता है वे यह बात नहीं समझते है कि मात्र एक कपड़े में ही उस व्यक्ति की पसंद , उसकी खुशी , उसकी भावनाएं छिपी हुई होंगी इस बात को जिसे हम नहीं समझ पा रहे है उसे हमें समझना चाहिए

        
मेरी दादी माँ मेरे पापा मम्मी के स्वागत समारोह पर 
        मेरे पास वो साड़ी है जिसे मेरी दादी माँ ने मेरे पापा मम्मी का विवाह जो मई १९८८ में हुआ था विवाह के उपरान्त स्वागत समारोह में पहनी थी वो साड़ी मुझे पसंद थी जब उनका निधन हुआ तो उनके कपड़े किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति को चाची और मम्मी मिलकर दे रहे थे कुछ साड़ियाँ चाची ने रख ली कि वे उन्हें पहन लेंगी
जब मैंने यह चोकलेटी कलर वाली साड़ी देखी तो मैंने कहा मुझे यह साड़ी बहुत पसंद है इसे मैं अपने साथ रखूंगी


        यह बात २००१ की होगी और आज 18 साल हो गए है तब से यह साड़ी मेरे पास ही है वैसे तो जब मैं छोटी थी तब मैं अपनी दादी माँ से कहती थी दादी माँ ये साड़ी मेरी है जब मैं बड़ी हो जाउंगी तो इसे पहनूंगी तब दादी माँ कहती थी हाँ बेटा यह साड़ी तुम्हारे लिए ही है जब तुम बड़ी हो जाओगी तब ये साड़ी पहनना और फिर उनका निधन हो गया और यह साड़ी मेरे पास ही आ गई


       इस साड़ी में मेरी दादी माँ का ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद छिपा हुआ है आज दादी माँ मेरे पास नहीं है पर जब भी मुझे उनकी याद आती है मैं यह साड़ी निकालकर देख लेती हूँ जब वे इस दुनिया को छोड़कर गई थी मेरी उम्र कच्ची थी मैं बहुत सारी चीजें नहीं समझती थी आज जब समझदारी आ गई तब समझ आया कि वाकई किसी के पहने हुए या दिए हुए कपड़े मात्र कपड़े नहीं होते है यह एक आशीर्वाद होता है जिसे हम संजोकर जरुर रखना चाहिए क्योंकि उनकी खुशबू प्यार दुलार छुपा  होता है


      
मेरी मम्मी श्रीमती लता कोकास अपने विवाह के अवसर पर 
          एक साड़ी मेरी मम्मी की है जिसे उन्होंने विवाह के अवसर पर पहनी थी मम्मी की इस साड़ी में प्यार , कुछ सपने छिपे हुए है हर लड़की को अपनी माँ , दादी माँ , नानी माँ की साड़ी को जरुर सहेजकर रखना चाहिए जी हाँ मेरे पास तो मेरी मम्मी और दादी माँ वो ख़ास साडीयाँ है और जीवनभर चाहे जहां रहूँ मैं ये दोनों साड़ियाँ बहुत सम्हालकर रखूंगी हर लड़की एक ना एक दिन दुल्हन बनती है सपना हर लड़की का होता है उसके विवाह का जोड़ा बहुत सुंदर , बहुत महंगा और बेशकीमती होना चाहिए पर इतना भी महंगा नहीं होना चाहिए हज़ार 2 हज़ार का लहंगा खरीद लिया और बस उस लहंगे को अपने विवाह के अवसर पहना और उसके बाद वो लहंगा किसी अवसर नहीं पहना जाता बस अलमारी में हैंगर में टंगा हुआ रहता है



      
माँ और दादी माँ की साड़ी 
             एक परम्परा बनाकर हम विवाह के अवसर पर अपनी माँ या दादी माँ , नानी माँ की शादी की साड़ी को पहन सकती है लेकिन पुरानी यादों के साये में बुने हुए कपड़े आपके महंगे लहंगों से कहीं ज्यादा वजनी होंगे और आपके साथ उनका आशीर्वाद भी होगा उस ख़ास दिन पर आप उस साड़ी को अच्छा ब्लाउज तैयार करके दुबारा साड़ी में नई चमक - दमक के साथ पहन सकती है
  मैं सोचती हूँ हज़ार रुपए का लहंगे में जितनी खूबसूरत नहीं लगेगी उससे ज्यादा खूबसूरत आप अपनी माँ या दादी जी की साड़ी में लगेगी उस ख़ास दिन पर दुल्हन बनकर सबसे ज्यादा खुशी महसूस करेंगी माना कि यह दिन जीवन में सिर्फ एक बार आता है सबकी ख्वाहिश होती है कि वह अपने उस खास दिन दुनिया की सबसे खूबसूरत दुल्हन दिखे पर ज़रा एक बार सोचकर तो देखिए ना कि महंगे लहंगा एक बार काम आएगा और साड़ी आप अपने विवाह में पहनने के बाद आने वाले हर अवसर पर पहन सकती है

10 टिप्पणियाँ:

Kranti Bhushan ने कहा…

अच्छा लेख है , भावनाओं से सराबोर ।

कोपल कोकास ने कहा…

धन्यवाद क्रांति जी

sarala sharma ने कहा…

आधुनिकता और पारम्परिकता का संतुलन ,समायोजन जरूरी है ।

Priya Singh ने कहा…

Bahut sundar aalekh😊...pyar aur ashirwaad rymhen...pyari konpal.🌹

कोपल कोकास ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
कोपल कोकास ने कहा…

धन्यवाद सरला जी

रेशमी धागों से बुनी थी वो साड़ी
धागे नहीं प्यार और अपनेपन से
बनी थी वो साड़ी
केवल साड़ी नहीं थी वो
दादी माँ का आशीर्वाद है वो साड़ी !

खुशकिस्मत हूँ वो ज़री गोटे फंदों वाली दुल्हन वाली साड़ी अब मेरे पास है

है यही अब मेरी ख्वाहिश और खुशी अब जिस दिन दुल्हन बनूं वो दादी माँ के सुनहरे तारों वाली साड़ी पहनकर ही दुल्हन बनूं तब ही दुल्हन वाला रूप धरूं उनके प्यार और उनकी खुशबू को स्वयं में महसूस करूं .

वो मेरी आँखों के समक्ष तो नहीं है पर मैं उन्हें महसूस करती हूँ और उस दिन भी जब अपने पिया जी संग विवाह बंधन में बंधूगी तब भी उन्हें स्वयं में महसूस करूंगी उनकी खुशी ,उनका , दुलार और उनका आशीर्वाद भी जो अगर वो होती तो मुझे देती .

कोपल कोकास ने कहा…

धन्यवाद प्रिया जी

कोपल कोकास ने कहा…

है यही अब मेरी ख्वाहिश और खुशी अब जिस दिन दुल्हन बनूं वो दादी माँ और मम्मी के सुनहरे तारों वाली साड़ी पहनकर ही दुल्हन बनूं तब ही दुल्हन वाला रूप धरूं उन दोनों के प्यार और उनकी खुशबू को स्वयं में महसूस करूं .

Neelima Karaiya ने कहा…

बहुत सही लिखा कोपल ।अपनो से जितने अंदर तक गहराई से जुड़े रहते हैंउनकी एक एक चीज से उतना ही लगाव होता है ।बहुत बहुत शुभकामनाएँ बेटा

Neelima Karaiya ने कहा…

बहुत सही लिखा कोपल ।अपनो से जितने अंदर तक गहराई से जुड़े रहते हैंउनकी एक एक चीज से उतना ही लगाव होता है ।बहुत बहुत शुभकामनाएँ बेटा

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