हमारा घर बारह साल का हो गया

     
       आज हमारे घर की बारहवीं सालगिरह है देखते देखते इतना वक़्त बीत गया । एक इमारत बनने से लेकर यहां इस घर में रमने जमने में । ऐसा लगता है जैसे यह कल की बात है हम इस घर में रहने आये हैं । याद आते हैं वे सभी दिन जब यह मकान बन रहा है इसमें लगी सभी लोगों की मेहनत , समय रोज देखने की इच्छा अब यह हो गया यह बाकी है । धीरे धीरे 2 साल में यह मकान बनकर तैयार हो गया और 2 दिसम्बर 2007 को हमने इस घर में प्रवेश किया । उसके बाद से यही रहने लगे ।
एक छोटे से घर बड़े घर में रहने के सुख की आदत होने लगी । 2007 के बाद से इस घर की बहुत सारी सालगिरह आयी जो खास ही थी पर जबसे हमारी शादी हुई उसके बाद से यह पहली बार है जो अनिल इस दिन पर हमारे साथ है और आज का यह दिन बेहद खास है ।

2 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (04-12-2019) को     "आप अच्छा-बुरा कर्म तो जान लो"  (चर्चा अंक-3539)     पर भी होगी। 
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

रेणु ने कहा…

वाह कोपल जी, आपका घर बहुत प्यारा है। और आप भी ,आपका नाम भी। ये घर खुशियों से आबाद रहे मेरी दुआ है क्योंकि घर की असली सजावट उसमें रहने वालों की हंसी खुशी है। हार्दिक शुभकामनायें और बधाई घर की सालगिरह पर🥞🌹🌹🥞🌹🌹🥞🌹🌹🌹🥞💐💐💐

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