मुम्बई बहुत ही खूबसूरत जगह है

हम बहुत दिनों से मुम्बई घूमने का प्रोग्राम बना रहे थे । हमारी पहचान नेट पर श्वेता चाची से हुई हम लोग मेल मित्र बने और उन्होने हमें मुम्बई आने के लिए आमंत्रित किया । मुम्बई जैसी जगह पर किसी का अपने घर आमंत्रित करना बहुत बड़ी होती है । 23 दिसंबर को सुबह तीन बजे हम लोग गीतांजली एक्सप्रेस से मुम्बई के लिए रवाना हुए । पूरा दिन हमारा ट्रेन में ही कटा दिन का खाना भी हमने ट्रेन में ही खाया । दिनभर किस तरह काटा चाची से थोड़ी थोड़ी देर में बात कर रहे थे वे हमें बताती जा रही थी अब कौन सा स्टेशन आयेगा । थोड़ी देर ट्रेन में सोये फिर इगतपुरी में हम लोगों ने वड़ापाव खाया बहत मजा आया नौ बजे हम दादर पहुँचे हमें लेने के लिये श्वेता चाची आशिष चाचा और आकांक्षा आये । हम उनके साथ टेक्सी से प्रभादेवी गये रास्ते में वे हमें मुम्बई दिखा रही थी और भी बहुत कुछ देखा टेक्सी से । फिर हम उनके घर पहुँचे वे सिल्वर ड्यूंस आपर्टेमेंट में रहती है । घर पर सोनू चाचा और दादाजी से मिले श्वेता चाची ने अपना घर दिखाया वाकई उनका घर बहुत प्यारा है । फिर हम सब लोगों ने मिलकर खाना खाया । उसके बाद सो गये क्योंकि बहुत थक गये थे सुबह उठे तब जाकर सफर की थकान दूर हुई । 24 दिसंबर को हम लोग मुम्बई के मशहूर मंदिर सिध्दीविनायक मंदिर गये । फिर वहाँ से हम शिवाजी पार्क गये वहाँ पर बहुत ही प्यारा दरिया देखा बहुत अच्छा लगा से हम लोग अपने घर के पास वाले दरिया पर गये वहाँ सब लोगों ने सेवपूरी भेलपूरी , पानीपूरी खाई । बहुत देर तक दरिया पर घूमते रहे । घर आकर खाना खाया सबके साथ देर रात तक बातें करते रहे । 25 दिसंबर को हम अपने रिश्तेदारों के यहाँ गये पहली बार मुम्बई की लोकल ट्रेन में सफर किया मजा आ गया । 26 दिसंबर को हम हाजी अली की दरगाह पर गये वहाँ हमने बहुत सारी फोटोग्राफस खीचंवाई उसके बाद दरगाह के पीछे दरिया पर गये । फिर वहाँ से हम लोग महालक्ष्मी मंदिर गये वहाँ प्रार्थना की । 27 को हम अपने रिश्तेदारों के घर गये आशिष चाचा ने वड़ा पाव बनाया । 28 को हम गेट वे आँफ इंडिया गये बहुत देर तक घूमें वहाँ से हम मरिन ड्राइव गये वहाँ हमने अपनी चाची के साथ बहुत सारी बातें की मस्ती की नरिमन पाइंट गये हैगिंग गार्डन गये । 29 को हम लोगों ने घर पर फिल्म देखी । रात को हम सी कोर्नर होटल गये खाना खाने वहाँ पर दरिया पर गये । 30 को हम मुम्बई के बहुत ही मशहूर बीच जुहू बीच पर गये वहाँ हम सब लोगों ने फोटो खिचंवाई सेवपूरी , भेलपूरी , खाई नारियल पानी पिया । हम लोगो ने पानी पर बहुत मजा किया । हमने वहाँ अपने कुछ खास दोस्तों के लिये प्यारे प्यारे तोहफे खरीदे । 31 साल का आखरी दिन हम जतरा मेला गये ये मेला अक्सर मकर संक्रति के पहले लगता है । वहाँ घूमे मस्ती की वहाँ से प्रभादेवी के मंदिर गये । घर पर हमारी मम्मी ने पुलाव बनाया घर पर ही हम लोगों ने मिलकर ढ़ेर सारी मस्ती की एक तो साल का आखरी दिन और हमारे आशिष चाचु का जन्मदिन उन्होने केक काटा फिर हम लोगों ने बहुत सारी मस्ती की 2 बजे रात तक हम लोगों ने मस्ती की । 1 जनवरी को भी हम लोगों ने ढ़ेर सारी खरीददारी और भी मस्ती की रात को चाचा ने केक काटा चाची ने चाइनिज बनाया रात भर हम लोग हँसते हँसाते रहे पापा की कविताँए सुनते रहे मस्ती करते रहे ना खुद सो रहे थे ना दूसरो को सोने दे रहे थे । 2 जनवरी को हम लोगों के जाने का दिन आ गया दिनभर हम अकु से साथ खेलते रहे कैसे दिन बीत गये पता ही नही चला रात को नौ बजे हमारे जाने का समय हो गया फिर हम टेक्सी से दादर स्टेशन आये ट्रेन से वापस दुर्ग आ गये 3 को हम दोपहर 4 बजे दुर्ग आ गये । इतनी प्यारी इतनी छुटिटयाँ आज तक इतनी खूबसूरत जगह पर नहीं बीती । बहुत खूबसूरत जगह है मुम्बई इतनी खूबसूरत की हर बार जाने का मन होता है । इंसान को एक बार कोई जगह अच्छी लगने लगे तो वो बार बार वहाँ जाना पसंद करेगा । हमें मुम्बई बहुत अच्छा लगा हम हर बार वही जाना पसंद करेगे ।